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बकाया भुगतान को लेकर कल होगी चर्चा, सीमेंट फैक्ट्री में श्रमिकों के बकाया भुगतान का मामला

दिल्ली में कंपनी प्रतिनिधियों व श्रमिक संगठनों की होगी बैठक मध्यस्थता कर रहे सेवानिवृत जस्टिस भी रहेंगे मौजूद

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बकाया भुगतान को लेकर कल होगी चर्चा, सीमेंट फैक्ट्री में श्रमिकों के बकाया भुगतान का मामला

Cement factory sawai madhopur

सवाईमाधोपुर. किसी जमाने में एशिया की सबसे बड़ी सीमेंट फैक्ट्री में ( Cement factory sawai madhopur ) शुमार रही सवाईमाधोपुर की द जयपुर उद्योग सीमेंट फैक्ट्री के श्रमिकों के बकाया भुगतान के मामले में एक नया मोड़ आने के आसार है। इस मामले को लेकर 18 अक्टूबर को दिल्ली में सीमेंट फैक्ट्री प्रबंधन व श्रमिक संगठनों के बीच वार्ता होगी। इसमें कुछ निर्णय की उम्मीद की जा रही है। गत दिनों हुई भारतीय सीमेंट मजदूर संघ एवं सर्वदलीय संघर्ष समिति की संयुक्त बैठक में श्रमिकों ने कंं पनी के साथ सम्मानजनक बकाया भुगतान को लेकर समझौता करने का निर्णय किया है।

इस संबंध में श्रमिक संगठनों व कंपनी प्रतिनिधियों की एक बैठक शुक्रवार को दिल्ली में होगी। बैठक में मामले की मध्यस्थता कर रहे सेवानिवृत जस्टिस आफताब आलम भी मौजूद रहेंगे। भारतीय सीमेंट मजदूर संघ एवं सर्वदलीय संघर्ष समिति ने बताया कि बैठक में श्रमिक कंपनी मालिकों के सामने अपना पक्ष रखेंगे। इसमें पूर्व में श्रमिकों की ओर से मांगी गई बकाया राशि को कम करने पर सहमति बनने के आसार है। इससे पहले मामले में 9 अक्टूबर को कोर्ट में मामले की सुनवाई हुई थी।

1154 आवास हैंं
मजदूर संगठनों का कहना है कि सीमेंट फैक्ट्री के सवाईमाधोपुर एवं फलौदी क्वारी में 1154 आवास हैं। इसका सुप्रीम कोर्ट में कोई मामला लंबित नहीं है। बीआईएफआर में आवासों का मामला लंबित है। बीमारू उद्योग होने के कारण इस पर स्टे लगा हुआ है। पूर्व में भी इस मामले में कोई निर्णय नहीं हो सका था और श्रमिक संगठनों ने इस बार भी आवासों के संबंध में कोई समझौता नहीं करने का निर्णय किया है। इसके अलावा बैठक में ग्रेच्युटी का ब्याज व पीएफ की पेंशन श्रमिकों को देने की मांग करने का निर्णय किया गया। सितम्बर 2016 में सुप्रीम कोर्ट ने मामले में बड़ा फैसला देते हुए कहा था कि फैक्ट्री पर मालिकाना हक गैनन डंकरले कंपनी का ही बनता है। क्योंकि अब तक वह ही प्रबंधन करती आई है। वहीं कंपनी को बकाया 35 करोड़ रुपए श्रमिकों को भुगतान करने के आदेश दिए थे। इसके बाद कंपनी की ओर से 35 करोड़ रुपए जमाए भी कराए गए, लेकिन श्रमिकों ने 97 करोड़ बकाया देने की मांग की थी। ऐसे में यह मामला अटक गया था।

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