
महिला दिवस
सवाईमाधोपुर: म न में कुछ करने की लगन व जज्बा हो तो कोई भी काम नामुमकिन नहीं है। आज कई महिलाएं अपने दम पर आत्मनिर्भर है बल्कि दूसरी महिलाओं के लिए प्रेरणा हैं। उन्होंने पुरुष प्रधान समाज की सोच को बदलने में कामयाबी हासिल की है। योग्यता सिद्ध कर बेटी व बेटे के बीच की खाई को पाटने का प्रयास किया है। अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर सवाईमाधोपुर की कुछ ऐसी ही सफल महिलाओं से राजस्थान पत्रिका ने बातचीत कर उनके अनुभव को पाठकों के साथ साझा करने का प्रयास किया है।
प्रेरित होकर खोला दिव्यांग संस्थान
रणथम्भौर रोड निवासी सीमा अरोड़ा ने अपने दिव्यांग बेटे से प्रेरित होकर दूसरे बच्चों को पढ़ा-लिखाकर शिक्षित करने को लेकर यश विकलांग संस्थान नाम से संस्था खोली। वर्तमान में वह संस्थान में बच्चों को ना केवल शिक्षित कर रही हैं, बल्कि रोजगार के काबिल भी बना रही हैं।
महिलाओं को बना रहीं आत्मनिर्भर
रणथम्भौर रोड निवासी उज्ज्वला जोधा दक्षकार लम्बे समय से दक्षकार केन्द्र चला रही हैं। मन में लगन व मेहनत से वह दूसरी महिलाओं के लिए भी प्रेरणादायक बनी हैं। कई महिलाओं को आत्मनिर्भर बना रही हैं। इसके अलावा महिलाओं को रोजगार से जोड़ रही हैं।
कोई महिला अशिक्षित नहीं रहे
महिला दिवस पर खण्डार प्रधान मनोरमा शुक्ला का कहना है कि अत्याचार को खत्म करने के लिए महिलाओं का एकजुट होना जरूरी है। 1995 में उनके जेठ खण्डार से सरपंच तथा 2000 में जेठानी खण्डार प्रधान रहीं। उनसे प्रेरित होकर वे राजनीति में आई हैं। उनकी प्राथमिकता है कि कोई भी महिला अशिक्षित नहीं रहे। पंचायत समिति स्तर पर वृद्धावस्था, निशक्तजन योजनाओं में महिलाओं को लाभ दिलाया जा रहा है। वहीं बालिका शिक्षा पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
नारी शक्ति का हो विकास
जब है नारी में शक्ति सारी तो फिर क्यों नारी को कहें बेचारी। इन्हीं पंक्तियों के साथ नगरपरिषद सभापति डॉ.विमला शर्मा ने महिला दिवस के अवसर पर महिलाओं को यह संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि नारी आज पुरुषों के बराबर कंधे से कंधा मिलाकर आगे बढ़ रही है। महिलाओं को शिक्षित करने व रोजगार के अवसर देने के लिए पूरा सहयोग दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि नगरपरिषद की ओर से महिलाओं के उत्थान के लिए लगभग 282 स्वयं सहायता समूह बनाए गए है। इनमें करीब तीन हजार महिलाओं को जोड़ा गया है।
बंदिशों का बोझ नहीं सहे नारी
गंगापुरसिटी. जननी के रूप में मां को ईश्वर से भी बड़ा माना गया है, लेकिन यह बात सिर्फ मुहावरों या किताबों तक नहीं सिमटे। महिला सम्मान सिर्फ बातों तक सीमित नहीं रहे और हर स्तर पर उस पर अमल हो, जिससे हर स्त्री को उसका हक मिल सके। 'यस्य पूज्यंते नार्यस्तु तत्र रमन्ते देवताÓ वाली कहावत को चरितार्थ करने से ही समाज का उद्धार संभव है। मां के रूप में नारी धरती पर सबसे पवित्रतम रूप है। पुरुष प्रधान समाज को यह बात भलीभांति समझनी होगी। तब ही सच्चे मायनों में नारी सशक्तीकरण होगा। यह बात सहायक कलक्टर सुनीता यादव ने महिला दिवस के मौके पर पत्रिका से कही। उन्होंने कहा कि महिला दिवस कोई एक दिन का जश्न, आजादी या समारोह नहीं होकर यह शुभकामना हमारे के लिए 365 दिन की होनी चाहिए। वेद पुराणों में भी महिला सशक्तीकरण की बात समाहित है। महिलाओं को खुद पर विश्वास करके आगे बढऩा चाहिए। इससे उनकी हर मंजिल आसान होगी। एसीएम यादव ने कहा कि हमारे विचार, सोच, स्वतंत्रता, हमारा मन और आत्मा सभी एक जैसी ही हैं तो सब कुछ समान ही होना चाहिए। उन्होंने कहा कि स्त्री, स्त्री है चाहे वह फाइटर प्लेन उड़ाए या घर में अपने परिवार को खाना बनाकर खिलाए। दोनों की महानता बराबर है। स्त्री सृष्टा, शक्ति और विश्वास है। हम सामाजिक कुरीतियों, अंधविश्वास एवं रूढि़वादिता की बेडिय़ों में नहीं जकड़ें तो हमारे लिए 365 दिन महिला दिवस है।
'वारिसÓ के रूप में पहचानी जाएं बेटियां
महिला के रूप में मां-बेटी, बहन और बहू ने ही पुरुष को काबिल और सशक्त बनाया है। बेटियों ने अपनी काबिलियत के झंडे चांद तक गाढ़े हैं। ऐसे में नारी शक्ति सच्चे सम्मान की हकदार है। विरासत संभालने की बात जब भी आए 'वारिसÓ के रूप में बेटा के साथ बेटी का नाम भी समाज में पूरे हक के साथ लिया जाना चाहिए। तब ही सच्चे मायनों में महिला सशक्तीकरण होगा। यह कहना है बीस भाषाओं में गाने के साथ बैली डांस कर वल्र्ड रिकॉर्ड बनाकर 'वल्र्ड बुक ऑफ लंदनÓ में नाम दर्ज कराने वाली डॉ. माधुरी शर्मा का। महिला दिवस पर 'पत्रिकाÓ से बातचीत में शर्मा ने कहा कि कानून ने बेटा-बेटी को समान दर्जा दिया है, लेकिन पुरुष प्रधान समाज में इसकी पुख्ता पालना नहीं हो रही। इस रुढि़वादी परंपरा को तोडऩे के लिए बेटियों को खुद आगे आकर विरासत संभालनी होगी।
उन्होंने कहा कि घूंघट की ओट से निकलकर बहू और बेटियों ने राजनीति और विभिन्न पदों पर आसीन होकर कमान अपने हाथों में ली है। यह नारी के लिए सुखद संकेत हैं। महिलाओं को शिक्षा को अपना हथियार बनाना होगा। इसके बलबूते ही वह इन बेडिय़ों को तोडऩे में कामयाब होंगी। हालांकि अच्छी शिक्षा के प्रति महिलाएं जागरूक हुई हैं। चौका-चूल्हा कराने जैसी मानसिकता से महिलाओं का भला नहीं होगा। हम सबको महिलाओं को उनके अधिकार दिलाने के लिए आगे आकर पहल करनी होगी। माधुरी शर्मा ने कहा कि बेटियां अपने मन का करें और खुद को साबित करें। इसके बाद समाज की रूढि़वादिता की बेडिय़ां स्वत: ही टूट जाएंगी।
प्राकृतिक संरक्षण के लिए कर रही जागरूक
भूरी पहाड़ी निवासी नेचर गाइड सूरजबाई मीना 2007 से लगातार नेचर गाइड का कार्य कर रही है। उनका प्राकृतिक संरक्षण में विशेष योगदान रहा है। अपने बड़े भाई हेमराज से प्रेरित होकर उन्होंने पर्यावण संरक्षण की ठान ली। इसके बाद लगातार पर्यावरण संरक्षण में विशेष प्रयास किए। दूसरी महिलाओं को भी प्रर्यावरण संरक्षण को लेकर लगातार जागरूक कर रही हैं। प्राकृतिक संतुलन व संरक्षण के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता से उत्कृष्ट कार्य करने पर सूरज बाई मीणा को मिर्जा राजाराम सिंह अवॉर्ड से सम्मानित किया गया है।
Published on:
08 Mar 2019 11:59 am
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