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800 फीट ऊंचाई पर 1300 साल प्राचीन है जयंती माता मंदिर

सवाईमाधोपुर जिले में रणथम्भौर के जंगल में भी माता के प्राचीन स्थल है। पहाड़ी पर स्थापित इन मंदिरों तक पहुंचना हालांकि मुश्किल भरा होता है लेकिन फिर भी काफी ं श्रद्वालु पहुंचते हैं। रणथम्भौर के जंगल में ऐसा ही स्थान है जयंती माता का मंदिर जो 800 फीट ऊंचाई पर 1300 साल प्राचीन है । खण्डार क्षेत्र में रणथम्भौर राष्ट्रीय अभयारण्य के तारागढ दुर्ग में विराजित जयंती माता का मंदिर करीब 1300 साल से भी प्राचीन है। करीब 800 फीट पहाडी पर बने दुर्ग की पूर्व दिशा में परकोटे से सटा हुआ जयंती माता का मंदिर है।

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800 फीट ऊंचाई पर 1300 साल प्राचीन है जयंती माता मंदिर

800 फीट ऊंचाई पर 1300 साल प्राचीन है जयंती माता मंदिर

800 फीट ऊंचाई पर 1300 साल प्राचीन है जयंती माता मंदिर

सवाईमाधोपुर जिले में रणथम्भौर के जंगल में भी माता के प्राचीन स्थल है। पहाड़ी पर स्थापित इन मंदिरों तक पहुंचना हालांकि मुश्किल भरा होता है लेकिन फिर भी काफी ं श्रद्वालु पहुंचते हैं। रणथम्भौर के जंगल में ऐसा ही स्थान है जयंती माता का मंदिर जो
800 फीट ऊंचाई पर 1300 साल प्राचीन है । खण्डार क्षेत्र में रणथम्भौर राष्ट्रीय अभयारण्य के तारागढ दुर्ग में विराजित जयंती माता का मंदिर करीब 1300 साल से भी प्राचीन है। करीब 800 फीट पहाडी पर बने दुर्ग की पूर्व दिशा में परकोटे से सटा हुआ जयंती माता का मंदिर है। माता के दरबार में हजारों श्रद्वालु ढोक लगाने आते है। नवरात्रो में यहां पर भक्तों को आना -जाना लगा रहता है। हालांकि वन्यजीवों का खतरा और रात के अंधेरे में यहां पर आना जाना जोखिम भरा है। इस कारण नवरात्राओं में भक्त पहाडी पर स्थित मंदिर में नवरात्र भी यहां ठहरकर करते हैं। आवाजाही दिन में ही करते हैं। जयंती माता का मेला भाद्रपद शुक्ला अष्टमी तिथि को भरता है
मंदिर पुजारी भरत दुबे ने बताया कि रियासत काल में निर्मित इस मंदिर को खास तरीके से बनाया गया है। मंदिर की सबसे बडी विशेषता यह है कि सूर्य की पहली किरण सीधे माता के चरणों में पहुंचती है। जैसे सूर्य देव स्वयं माता की वंदना कर रहे हों। मान्यता है कि श्रद्वा भाव से आने वाले भक्तों की यहां मनौती पूरी होती है। माता की प्रसिद्धि के कारण राजस्थान मध्यप्रदेश, उतरप्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात से हजारों श्रद्वालु हर वर्ष यहां आकर ढोक लगाते हैं।

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