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पौष्टिक शहद को तरसा गईं मधुमक्खियां

- जलवायु परिवर्तन के चलते जिले में पाई जाने वाली मधुमक्खियों की प्रजाति हो गई विलुप्ति, कुछ कर गई पलायन- मध्यप्रदेश विज्ञान सभा के सर्वे में सामने आई हकीकत

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पौष्टिक शहद को तरसा गईं मधुमक्खियां

पौष्टिक शहद को तरसा गईं मधुमक्खियां

कराहल
बीते सालों में मौसम का बदलता मिजाज मधुमक्खियों को रास नहीं आया इसलिए मधुमक्खी की कुछ प्रजाति विलुप्त हो गई तो कुछ जिले से पलायन कर गई। जिससे जड़ीबूटी युक्त पौष्टिक शहद को जिलेवासी तरस गए हैं। मध्यप्रदेश विज्ञान सभा के सर्वे में सामने आया कि मधुमक्खियों के लिए तीनों मौसम अब अनुकूल नहीं है। जिले के कराहल ब्लॉक में शहद के अधिकता वाले इलाकों में यह सर्वे किया गया था। भोपाल विज्ञान सभा से आए सीनियर साइंटिस्ट डॉ. उमाशंकर शर्मा व कराहल विज्ञान सभा प्रभारी वीरेन्द्र पाराशर ने यह सर्वे किया।
ग्राम ऊपरीखोरी के जंगल में लैचौरा खोह, पनहा, खोह, झल्लाद, खोह ,देव खो ,भौर खोह में यह सर्वे किया गया। सर्वेक्षण में पाया गया कि मधुमक्खियां इस क्षेत्रों में काफी कम संख्या में रह गई हैं। जिन खोह में 250 से 300 छत्ते लगा करते थे उनमें महज 10-15 छत्ते मधुमक्ख्यिां लगा रही हैं। सर्वेक्षण के दौरान शहद का संग्रहक करने वाले लोगों से चर्चा करने के दौरान सामने आया कि ज्यादातर जंगल में छोटी मधुमक्खी , कौती मधुमक्खी देखने को मिल रही। वर्तमान में जंगल में पानी तो है लेकिन फूल, फल न होने की वजह से भंवर मधुमक्खियां दूसरे स्थान पर पलायन कर गई हैं।
जलवायु परिवर्तन का असर
संग्रहकों के अनुसार आषाढ़ के महीने की शुरुआत में जंगल हरभरा हो जाता है, लेकिन समय पर बारिश नहीं होने से औषधीय फूल नहीं फूलते हंै। ऐसे में भंवर मधुमक्खियां अपना छत्ता लगाना शुरू करती है। जब मधुमक्खी को शहद संग्रहण करने को निकलती है तो पर्याप्त नहीं कर पाती है। बिना बारिश के फूल भी नहीं निकलते हैं। संग्राहको में प्रहलाद आदिवासी, सीता आदिवासी, खैर आदिवासी, किशन आदिवासी, लाखन आदिवासी, महेश आदिवासी प्रमुख है।
सोना मधुमक्खी भी पाई जाती है
सोना मधुमक्खी का भले ही कम शहद का संग्रह करती है, लेकिन वह बड़ा गुणकारी होता है। यह एक विशेष महत्व रखती है इस का शहद बहुत कम मिलता है ।
वीरेन्द्र पाराशर ने बताया की संग्राहकों से चर्चा के दौरान जानकारी मिली है कि कराहल के जंगलो मे सतगवभा मधुमक्खी भी पाई जाती है। जिसको स्थानीय भाषा मे सोना या मेहरा मधुमक्खी भी कहते है। कराहल क्षेत्र में चार प्रकार की मधुमखिया प्रमुख है। भंवर मक्खी , सोना मक्खी ,कोती मख्खी , छोटी मक्खी बहुत संख्या में पाई जाती है ।
इनका कहना है
मधुमक्खियों के विलुप्त होने व पलायन करने का मूल कारण जलवायु परिवर्तन है। यहां तीनों मौसम अब उनके अनुकूल नहीं रहे हैं।
डॉ. उमाशंकर शर्मा
सीनियर साइंटिस्ट, विज्ञान सभा मध्यप्रदेश