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KBC में 50 लाख जीती थी यह महिला अधिकारी, अब सरकारी नौकरी में हो रही है अपमानित

‘मुझे बना दिया बाबू और जूनियरों को दे रखे तहसीलों के प्रभार, ये मेरे के लिए अपमानजनक’

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श्योपुर/ केबीसी में 50 लाख रुपये जीतकर कभी मध्यप्रदेश का मान बढ़ाने वाली महिला तहसीलदार आज सरकारी नौकरी में अपमानित महसूस कर रही है। आठ साल पहले केबीसी में पचास लाख जीत रातोंरात सुर्खियों में आईं तहसीलदार अमिता सिंह ने बड़े अधिकारियों पर कई आरोप लगाए हैं। अमिता अकेले ही उनकी बेटी भी इस बार केबीसी में पहुंची थी। अमिता ने आरोप लगाए हैं कि उनसे लिपिक का काम करवाया जा रहा है।

अमिता सिंह ने चंबल संभाग के कमिश्नर को चिट्ठी लिख शिकायत की है। उन्होंने लिखा है कि वर्तमान में मैं जिले के सभी तहसीलदारों में वरिष्ठ हूं, उसके बाद भी मुझे तहसील में पदस्थ न किया जाकर निर्वाचन कार्यालय में बाबू काम दे रखा है, जबकि जूनियरों और नायब तहसीलदारों को तहसीलों का प्रभार दे रखा है। ये मेरे लिए अत्यधिक क्लेश और अपमानजनक की स्थिति है। कुछ इन्हीं शब्दों के साथ महिला तहसीलदार अमिता सिंह तोमर ने चंबल संभाग कमिश्नर को आवेदन भेजा और तहसील में पदस्थापना कराने की मांग की है।

नहीं मिला है प्रभार

लगभग चार माह पूर्व 11 जुलाई को श्योपुर में पदस्थ हुई महिला तहसीलदार अमिता सिंह तोमर को कलेक्टर द्वारा अभी तक तहसील का प्रभार नहीं दिया गया है, जबकि वर्तमान में जिले की श्योपुर और बड़ौदा तहसीलों में नायब तहसीलदार पदस्थ हैं। इसी से आहत महिला तहसीलदार पहले भी फेसबुक पोस्ट के जरिए दर्द बयां कर चुकी हैं। वहीं अब उन्होंने बीते रोज कमिश्नर चंबल संभाग को आवेदन भेजा है।


जूनियर को मिली है जिम्मेदारी

भेजे गए आवेदन में तहसीलदार अमिता सिंह ने लिखा है कि श्योपुर जिला मुख्यालय की तहसील और बड़ौदा तहसील में नायब तहसीलदार पदस्थ हैं और ये नायब तहसीलदार परीविक्षाधीन हैं, बावजूद इनको प्रभार दिया हुआ है और मैं वरिष्ठ तहसीलदार होने के बाद भी मुझे निर्वाचन कार्यालय में एक लिपिक स्तर का कार्य दिया गया है।

अपमान है मेरा

अमिता सिंह ने लिखा कि ये मेरी वरिष्ठता के लिए अपमानजनक है बल्कि नियम विरुद्ध भी है। उन्होंने पत्र में लिखा है कि निर्वाचन कार्यालय में तहसीलदार का पद नहीं होने के कारण मेरा वेतन भी कराहल तहसील से किया आहरण हो रहा है। ऐसे में पद के अनुरूप कार्यभार नहीं दिए जाने से मुझे अत्यधिक क्लेश और हीनभावना का अनुभव हो रहा है, साथ ही ये पदस्थापना न्यायोचित है न ही विधिसम्मत।

केबीसी में जीत चुकी हैं 50 लाख

महिला तहसीलदार रहीं अमिता सिंह ने एक समय में अपनी उपलब्धियों की वजह से प्रदेश का मान-सम्मान बढ़ाया था। सरकारी सेवा में रहते हुए 2011 में वह केबीसी में पहुंची थीं। अमिताभ के सामने हॉट सीट पर बैठ वह सवालों का जवाब देकर पचास लाख रुपये जीती थी। केबीसी से लौटने के बाद मध्यप्रदेश में अमिता सिंह का कई जगहों पर सम्मान भी हुआ था।

बेटी भी पहुंची इस बार

वहीं, इस बार 2019 में अमिता सिंह की बेटी डॉ आदिति सिंह भी केबीसी में पहुंची। लेकिन वह फास्टेस्ट फिंगर फर्स्ट तक ही पहुंच पाई। वह आगे अमिताभ बच्चा के साथ हॉट सीट पर नहीं बैठ पाई। डॉ आदिति अभी श्योपुर जिला अस्पताल में महिला बाल विकास विभाग के संचालित वन स्टॉप सेंटर में प्रशासक के पद पर पदस्थ हैं।