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संरक्षण के अभाव में खंडहर हो गई पांच सौ साल पुरानी गढ़ी

अपने अनोखे भित्ती चित्र के लिए जानी जाती है ये गढ़ी, संभागभर में अद्वितीय है रागमाला के चित्र    

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संरक्षण के अभाव में खंडहर हो गई पांच सौ साल पुरानी गढ़ी

संरक्षण के अभाव में खंडहर हो गई पांच सौ साल पुरानी गढ़ी

मनपुर(श्योपुर). भले ही श्योपुर के मानपुर की गढ़ी ऐतिहासिक हो, लेकिन इसके बाद भी यह ऐतिहासिक गढ़ी अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रही है। श्योपुर जिला मुख्यालय से 35 किलोमीटर दूर ग्राम मानपुर में लगभग पांच सौ साल पुरानी ऐतिहासिक गढ़ी आवश्यक मरम्मत एवं देखभाल के अभाव में खंडहर में तब्दील होती जा रही है,वहीं गढ़ी में एक के बाद एक महल और कलात्मक चित्रों की शृंखला प्रशासनिक उपेक्षा के चलते अस्तित्व खोते जा रहे है।


बावजूद इसके पुरातत्व विभाग ने अभी तक इसकी सुध नहीं ली है। हालांकि कुछ साल पूर्व विभाग ने ग्रामीण क्षेत्र की धरोहरों का सर्वे कराया था, लेकिन अभी तक मानपुर गढ़ी को संरक्षित स्मारकों की सूची में शामिल नहीं किया जा सका है। बताया जाता है कि लगभग पांच सौ साल पूर्व सीप नदी किन किनारे गौड़वंशीय राजा मानसिंह ने इस गढ़ी का निर्माण कराया था। 13 बीघा के क्षेत्र मेंं फैली ये गढ़ी वर्तमान में संरक्षण के इंतजार में है।


अद्वितीय है रागमाला के दुर्लभ चित्र


किले के रानी महल में चित्रित 36 राग-रागनियों के भित्ती चित्र इस किले की खास पहचान है। मानपुर के अलावा राग मालाओं के चित्र ग्वालियर किले में देखे जा सकते है। किंतु देखरेख के बिना रागमाला के चित्र नष्टï होने की कगार पर है। पालकी महल में लगी पत्थरों की नक्काशीदार कलात्मक जालियां नष्ट हो चुकी है। पालकी महल, और बारहद्वारी अभी सलामत हैं लेकिन दीवाने खास, दीवाने आम, रानी महल और घुड़साल जैसी प्राचीन इमारतें खण्डहर हो चुकी है। इमारतों में बने कठपुतलियों के दुर्लभ चित्रों पर धुंएं की कालिख चढ़ती जा रही है। क्योंकि गढ़ी में पिकनिक मनाने आने वाले लोगों द्वारा पालकी महल में भोजन बनाया जाता है।

मानपुर गढ़ी के संरक्षण के लिए प्रयास किए जाएंगे। इसके संरक्षण के लिए पिछले दिनों हुई जिला पुरातत्व और पर्यटन परिषद की बैठक में चर्चा हुई और परिषद के कार्यों में सूचीबद्ध किया गया है।


रूपेश उपाध्याय, एसडीएम एवं नोडल अधिकारी जिला पुरातत्व व पर्यटन परिषद श्योपुर