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अब जिला अस्पताल में नहीं हो सकेगा बच्चों का इलाज ?

दो शिशु रोग विशेषज्ञ ने भरा बीआरएस, तीसरे होंगे रिटायर, नए डॉक्टरों से भी नहीं हो रहा संपर्क  

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शिवपुरी. जिला अस्पताल शिवपुरी के आईसीयू में लटका ताला पिछले सात माह में खुल नहीं सका और अब शिशु वार्ड में भी डॉक्टर नहीं मिलेंगे। क्योंकि तीन शिशु रोग विशेषज्ञ में से दो ने बीआरएस भर दिया, जबकि तीसरे दिसंबर के अंत में रिटायर हो रहे हैं। जिन तीन नए डॉक्टरों की पदस्थापना जिला अस्पताल में करने का आदेश जारी हुआ, उनसे भी संपर्क नहीं हो पा रहा। ऐसे में जिले की स्वास्थ्य सेवाएं सुधरने की बजाए और अधिक बिगड़ते नजर आ रहे हैं। सीएस का कहना है कि शिशु रोग विशेषज्ञ के न होने पर हम पीजी डॉक्टरों से काम चलाएंगे।
गौरतलब है कि जिला अस्पताल शिवपुरी में मेडिकल विशेषज्ञ न होने एवं आईसीयू में ताले लटके होने से दिल के मरीजों को उपचार नहीं मिल पा रहा। अभी तक अस्पताल में तीन शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. आरएस गुप्ता, पीके दुबे एवं निसार अहमद पदस्थ रहे, लेकिन डॉ. गुप्ता व डॉ. दुबे ने बीआरएस ले लिया, जबकि निसार अहमद 31 दिसंबर को रिटायर हो रहे हैं, जिसके चलते वे भी अवकाश पर चले गए। इन हालातों के बीच जिला अस्पताल में अब कोई भी शिशु रोग विशेषज्ञ नहीं होगा। अभी सर्दी के मौसम में भले ही चिल्ड्रन वार्ड में अधिक बच्चे भर्ती नहीं हैं, लेकिन बीमारियों के सीजन में मरीजों की भरमार हो जाती है। उन हालातों में बच्चों का इलाज कैसे और कौन करेगा? यह बड़ा सवाल है।
यह ढूंढ रहे विकल्प
जिला अस्पताल में शिशु रोग विशेषज्ञ न होने पर उनकी जगह अब डॉ. राजकुमार ऋषिश्वर एवं डॉ. अनूप भार्गव को यह जिम्मेदारी दी जाएगी। हालांकि वे इसमें विशेषज्ञता नहीं रखते, लेकिन पीजी किए जाने की वजह से उन्हें यह जिम्मेदारी देने की तैयारी है। यह डॉक्टर बच्चों का इलाज तो कर सकेंगे, परंतु जो योग्यता शिशु रोग विशेषज्ञ रखते हैं, वो उनमें नहीं है।
स्वास्थ्य सेवाओं से महरूम हो रहा अस्पताल
जिला अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार होने की बजाए दिनों दिन बिगड़ती जा रही है। सीनियर सर्जन डॉ. एसके कुम्हरा के अलावा एक अन्य डॉक्टर भी जनवरी में रिटायर हो रहे हैं। पुराने डॉक्टर या तो बीआरएस ले रहे हैं अथवा रिटायरमेंट के बाद उनकी कुर्सी खाली हो रही है। उनकी जगह दूसरे डॉक्टर मिल नहीं पा रहे, ऐसे में जिला अस्पताल के नाम पर एक आलीशान भवन ही बना रह जाएगा, जबकि उसमें स्वास्थ्य सेवाएं नहीं मिलेंगी। शिवपुरी जिले में स्वास्थ्य सेवाएं सुधरने की बजाए और अधिक बिगड़ती जा रही हैं। यह हालात तब हैं, जबकि प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री ही शिवपुरी जिले के प्रभारी मंत्री भी हैं। ज्ञात रहे कि कोलारस उपचुनाव में भी शिवपुरी जिला अस्पताल का मुद्दा छाया हुआ है। अभी हाल ही में सांसद सिंधिया ने स्वास्थ्य सेवाएं ध्वस्त होने की वजह से रामसिंह यादव की मौत होना बताया, तो भाजपा के चुनाव प्रभारी रामेश्वर शर्मा ने कहा था कि शिवपुरी जिले में स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर हैं। यानि सत्ताधारी दल के नेता सिर्फ बातें कर रहे हैं, जबकि हकीकत इसके उलट है।

दो सीएस अभी भी तैनात
जिला अस्पताल में डॉक्टरों की भले ही कमी है, लेकिन सिविल सर्जन दो-दो तैनात हैं। पूर्व सीएस डॉ. गोविंद सिंह अभी भी हर दिन अस्पताल आते हैं और नीचे वाले कमरे में बैठकर चले जाते हैं। जबकि शासन आदेश से नियुक्त किए गए सीएस डॉ. जसराम त्रिवेदिया ऊपर वाले कक्ष में बैठ कर काम निपटा रहे हैं। इतना जरूर है कि दो माह से डॉ. सिंह का वेतन जिला अस्पताल से जारी नहीं किया गया। क्योंकि दो माह पूर्व उन्हें ग्वालियर ट्रांसफर होने पर रिलीव कर दिया था। लेकिन उन्होंने वहां ज्वाइनिंग नहीं दी।

हम भी करेंगे सहयोग
यह बात सही है कि जिला अस्पताल में शिशु रोग विशेषज्ञ अब नहीं होंगे, तो डॉ. ऋषिश्वर व डॉ. अनूप को जिम्मेदारी देंगे। मैं भी शिशु रोग विशेषज्ञहंूं, तो जितना समय मिलेगा, मैं भी सहयोग करूंगा। जिन तीन नए डॉक्टरों की पदस्थापना की गई, वे अभी तक नहीं आए और उनका मोबाइल नंबर न होने से हम संपर्क भी नहीं कर पा रहे।
डॉ. जेआर त्रिवेदिया, सिविल सर्जन जिला अस्पताल शिवपुरी