
जबलपुर। जिले के बेलखेड़ा उडऩा मेढ़ी में गेंहू खरीदी में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। खरीदी समिति के प्रबंधक, प्रभारी और ऑपरेटर ने मिलीभगत कर ई-उपार्जन पर किसानों की फर्जी सूची अंकित कर 685 मीट्रिक टन गेहूं का गोलमाल कर 1.32 करोड़ की चपत लगाई है। पाटन थाने में तीनों के खिलाफ धारा 420, 467, 468, 470, 34 भादंवि का प्रकरण दर्ज किया गया। पाटन में कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी वसुंधरा पेंड्रो ने शिकायत दर्ज कराई कि दो जून को जिला विपणन अधिकारी विवेक तिवारी ने खरीदी केंद्र बेलखेड़ा उडऩा मेढ़ी के क्रमांक-तीन और चार का निरीक्षण किया था।
समिति प्रबंधक सहित तीन के खिलाफ प्रकरण दर्ज
क्रमांक तीन में 148 मीट्रिक टन और क्रमांक चार में 538 मीट्रिक टन गेहूं कम मिला। इसकी कीमत 1.32 करोड़ रुपए है। दोनों खरीदी केंद्रों से भंडारण केंद्र भेजे गए गेहूं में से 2574 क्विंटल गेंहू अमानक (रेत, मिट्टी मिक्स) मिला। समिति प्रबंधक मुन्नालाल बरखेड़ा, केंद्र प्रभारी रोहित शर्मा और ऑपरेटर अनुज दुबे ने निर्देशों के विपरीत अमानक गेहूं खरीदी कर भंडारण के लिए भेजा। साथ ही ट्रक एमपी 20 जीए 7506 से पुराने बारदाने में मिट्टी युक्त गेहूं अन्यत्र स्थान से भरकर लाया गया। उक्तबोरों से गेहूं खरीदकर केंद्र पर ढेर लगाया था।
...और यहां हर साल सड़ जाता है हमारा लाखों टन गेहूं
गेहूं खरीदने के बाद केंद्र सरकार एफसीआई के जरिए अक्टूबर से मार्च तक गेहूं बेचने के लिए ग्लोबल टेंडर करता है। इसके बाद भी हर साल करीब 20 से 30 लाख टन गेहूं नहीं बिक पाता। साथ ही हजारों टन गेहूं रखे-रखे ही सड़ जाता है। बाद में सड़ा हुआ गेहूं बहुत कम कीमत में शराब कारोबारी खरीद कर उससे शराब बनाते हैं।
14 साल से बंद है योजना
सरकार पहले एपीएल कार्डधारियों को सामान्य और सस्ती दर पर सरकारी उचित मूल्य की दुकानों से गेहूं-चावल उपलब्ध कराती थी। यह योजना भारत सरकार ने वर्ष 2006 में बंद कर दी। इसके बदले में खाद्य सुरक्षा बिल लाया गया। इसमें सिर्फ गरीबों और अति गरीबों को शामिल किया।
Updated on:
08 Jun 2020 01:13 pm
Published on:
08 Jun 2020 11:49 am
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