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सीकर के सरकारी जनाना अस्पताल में अब नहीं मिलेंगे 24 घंटे चिकित्सक, जानिए क्यों

चिकित्सा मंत्री के गृह जिले का एकमात्र सरकारी जनाना अस्पताल मरीजों को राहत देने की बजाए आहत कर रहा है।

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sikar govt janana hospital

सीकर. चिकित्सा मंत्री के गृह जिले का एकमात्र सरकारी जनाना अस्पताल मरीजों को राहत देने की बजाए आहत कर रहा है। बानगी है कि 16 करोड की लागत से बने अस्पताल में प्रतिनियुक्ति पर लगी दो महिला चिकित्सकों को विभागीय आदेशों के तहत मूल स्थान पर भेज दिया गया। इससे अस्पताल की व्यवस्था बेपटरी हो गई है। जबकि अस्पताल में 11 महिला चिकित्सकों की पोस्ट खाली है। अस्पताल में आने वाले मरीजों की सोनोग्राफी तक चिकित्सकों को करनी पड़ रही है। अस्पताल का ड्यूटी चार्ट गडबड़ा गया है। अस्पताल में 24 घंटे चिकित्सकों की सुविधा मिलना भी मुश्किल हो गया है। अस्पताल प्रभारी ने समस्या को लेकर जिला कलक्टर व सीएमएचओ को अवगत कराया है। दोनो अधिकारियों ने जनाना अस्पताल प्रभारी को प्रति माह के हिसाब से नए चिकित्सक लगाने की बात कही गई है।


अब यह है परेशानी
जनाना अस्पताल का उद्घाटन 31 मई को हुआ था। प्रति नियुक्ति पर कार्यरत एक महिला चिकित्सक डॉ. प्रियंका कीे जनवरी 2018 में ही प्रतिनियुक्ति में निरस्त कर दी गई। दो माह बाद ही मुख्यमंत्री के दौरे के दौरान दो चिकित्सकों को मूल स्थान पर भेज दिया है। वर्तमान में एक महिला चिकित्सक ही कार्यरत है। एक चिकित्सक तो स्वयं की बीमारी के कारण अवकाश पर चली गई है।

पांच अगस्त 2017 में उद्घाटन के समय स्वास्थ्य राज्य मंत्री बंशीधर बाजिया व प्रभारी मंत्री राजकुमार रिणवा ने चिकित्सक लगाने का आवश्वासन दिया था लेकिन जिम्मेदारों की बेरुखी के कारण नए चिकित्सक लगाना तो दूर पहले से प्रतिनियुक्ति पर लगे चिकित्सकों को भी भेज दिया गया। प्रतिनियुक्तियां भी निरस्त हो गई है। जनाना अस्पताल में चिकित्सकों की संख्या के मुकाबले मरीजों का भार ज्यादा है। अस्पताल में रोजाना औसतन 250 मरीजों की ओपीडी रहती है। 150 से ज्यादा प्रसूताएं अस्पताल में हर समय भर्ती रहती है। हर दिन एक से ज्यादा सीजेरियन डिलीवरी कराई जाती है। चिकित्सकों की संख्या और सीनियर चिकित्सकों की ज्यादा उम्र को देखते हुए हर समय इतने मरीजों को संभालना मुश्किल हो जाएगा। 24 घंटे अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टर की मौजूदगी की समस्या भी बढ़ जाएगी।


शुरु से लापरवाह व्यवस्था
अस्पताल में 100 बैड स्वीकृत है लेकिन महज 30 बैड का स्टाफ ही सेवाएं दे रहा है। इससे अस्पताल के सुचारू संचालन में बाधाएं आ रही हैं। स्टाफ की कमी के कारण मरीजों की सही तरीके से देखरेख भी नहीं हो पाती है। वहीं चिकित्सक व नर्सिंग स्टाफ को डबल ड्यूटी देनी पड़ रही है। यह है कारण कल्याण अस्पताल में चल रहे मातृ एवं शिशु इकाई के अधिकारियों को नए भवन में भेज तो दिया लेकिन कर्मचारियों की संख्या में इजाफा नहीं किया गया। इसे व्यवस्था बेपटरी रही। निगरानी नहीं होने के कारण अस्पताल में बख्शीश लेने के प्रकरण भी बढ़ते जा रहे हैं।

~मुश्किल हो चला
जनाना अस्पताल में चिकित्सकों की प्रतिनियुक्ति निरस्त होने से अब ड्यूटी चार्ट बनाना भी मुश्किल हो गया है। समस्या को लेकर जिला कलक्टर व सीएमएचओ को अवगत कराया है । जहां से नए चिकित्सक लगाने का आश्वासन मिला है। डॉ. बी.एल. राड, प्रभारी, एमसीएच विंग, सीकर