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6 फौजियों ने रिटायरमेंट के बाद कर दिखाया कमाल, 3 हजार स्कूलों को दिलवाए 30 करोड़ रुपए

सेना से रिटायर्ड छहों दोस्त मिलकर तीन हजार सरकारी विद्यालयों में दानदाताओं के सहयोग से अब तक करीब तीस करोड़ रुपए के विकास कार्य करवा चुके।

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सीकर. जज्बा व जुनून तो बचपन से ही रहा है। इसी जज्बे के चलते पहले देश की सरहदों को महफूज रखने का कार्य किया। सेना से रिटायर्ड हो गए, लेकिन मन से नहीं। अभी भी वे उसी जोश व जुनून से कार्य कर रहे हैं। अंतर इतना है पहले सरहद की रक्षा में जुटे रहे अब वे शिक्षा की अलख जगा रहे हैं।

बात कर रहे हैं सेना से रिटायर्ड हुए छह दोस्तों की। यह छहों दोस्त मिलकर तीन हजार गांव व ढाणियों में जाकर सरकारी विद्यालयों में दानदाताओं के सहयोग से अब तक करीब तीस करोड़ रुपए के विकास कार्य करवा चुके। पिछले वर्ष इन्होंने गर्मी की छुट्टियों में तेरह जिलों में नामांकन बढ़वाने, सरकारी योजनाओं का प्रचार प्रसार करने तथा दानदाताओं के सहयोग से भवन में अन्य सुविधाएं जुटाने का कार्य किया था। रिटायर्ड होने के बाद सभी छहों फौजी अभी सरकारी शिक्षक हैं।

कार से योजनाओं का प्रचार


भारतीय नौ सेना में पेटी ऑफिसर से रिटायर्ड मदन गढ़वाल लक्ष्मणगढ़ तहसील के रामचंद्र का बास का रहने वाले हैं। वे पंद्रह वर्ष तक सेना में रहे। इसके बाद वे सरकारी शिक्षक बन गए। अभी झुंझुनूं जिले की नवलगढ़ तहसील के देवीपुरा बणी गांव के सरकारी विद्यालय में शिक्षक हैं। खुद की पूरी कार पर सरकारी विद्यालयों में मिलने वाली योजनाओं के पम्पलेट व स्टीकर चिपका रखे हैं। पूरा खर्चा भी खुद ही वहन कर रहे हैं।

जिस गांव में जाते हैं वहां के प्रमुख लोगों को बुलाते हैं। सरकारी विद्यालयों के शिक्षकों की योग्यता व निजी की तुलना करते हैं। सरकारी योजनओं की जानकारी दे रहे हैं। पम्फलेट का वितरण करवा रहे हैं। वहीं के दानदाताओं को प्रेरित कर कहीं कम्प्यूटर लगवा रहे हैं तो कहीं टेबल कुर्सी दिलवा रहे हैं। कहीं बैग का वितरण करवा रहे हैं तो कहीं टाई बेल्ट, ड्रेस व जूतों का वितरण करवा रहे हैं।

शुरुआत सीकर व झुंझुनूं से


रिटायर्ड फौजियों ने अपने अभियान की शुरुआत वर्ष 2015 में सीकर व झुंझुनूं जिले से की थी। इसके बाद दो वर्ष तक राजस्थान पत्रिका की ओर से चलाए गए नींव अभियान से जुड़े रहे। अब यह हर वर्ष गर्मी की छुट्टियों में अनेक जिलों में इसी प्रकार शिक्षा की अलग जगा रहे हैं। नागौर जिले के उम्मेद सिंह धायल, कटराथल के श्रवण कुमार, सीकर के श्रीराम पिलानिया, पाटोदा के विद्याधर लूणीवाल व सीकर के सुरेन्द्र महण इस अभियान में कंधे से कंधा जुटाकर जुटे हुए हैं।

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