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बेटा बीमार हुआ तो मां छुट्टी लेकर आई, शिक्षकों के साथ पिता ने बढ़ाया हौसला, नीट में चमका गुरुकृपा का महेश

यदि मन में कुछ करने का जुनून हो तो तमाम मुसीबतों को मात देकर भी इतिहास रचा जा सकता है। यह साबित कर दिखाया है एनटीए की ओर से शनिवार को घोषित नीट के परिणाम में पहली रैंक हासिल करने वाले होनहार महेश कुमार ने।

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सीकर

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Ajay Sharma

Jun 15, 2025

NEET Topper MAHESH kUMAR

Photo- Patrika

सीकर.

यदि मन में कुछ करने का जुनून हो तो तमाम मुसीबतों को मात देकर भी इतिहास रचा जा सकता है। यह साबित कर दिखाया है एनटीए की ओर से शनिवार को घोषित नीट के परिणाम में पहली रैंक हासिल करने वाले होनहार महेश कुमार ने। मूलत: नोहर हनुमानगढ़ निवासी होनहार महेश कुमार ने 720 में से 686 अंक हासिल कर पहले ही प्रयास में इतिहास रचा है। होनहार ने तीन साल सीकर में रहकर नीट की तैयारी की। होनहार ने सीकर के गुरुकृपा कोचिंग संस्थान के छात्रावास में रहकर पढ़ाई की। होनहार के पिता रमेश कुमार सिन्धी व मां हेमलता भागवानी शिक्षा विभाग में तृतीय श्रेणी शिक्षक के पद पर कार्यरत है। नीट परीक्षा से लगभग ढ़ाई महीने महेश बीमार हो गया। इसलिए मजबूरन गांव जाकर पढ़ाई करनी पड़ी। परीक्षा के नजदीक आने पर मां हेमलता ने सीकर महेश के साथ रहकर हौसला बढ़ाया। महेश की आयु पिछले 16 साल होने की वजह से वह नीट में शामिल नहीं हो सका था।

जुनून: पहले कला संकाय लेने का मन, फिर ली विज्ञान

पत्रिका से खास बातचीत में महेश कुमार ने बताया दसवीं बोर्ड परिणाम में 97.17 फीसदी अंक हासिल किए तो यूपीएससी की तैयारी करने का मन बनाया। लेकिन बड़ी बहन व शिक्षकों ने विज्ञान लेकर नीट की तैयारी करने की सलाह दी। बहन की सीख को हमेशा जेहन में यादकर रखकर तैयारी। बारहवीं कक्षा में महेश ने 90.80 फीसदी अंक हासिल किए।

सीख: पहली बार में हर टॉपिक को अच्छे से पढ़ना होगा

होनहार ने बताया कि जो भी काम करो पूरी शिद्दत से करो, मैंने तो माता-पिता के साथ शिक्षकों से यही सीखा है। दसवीं कक्षा में तभी से आदत है कि पहली बार में हर टॉपिक को इतने अच्छे से पढ़ो कि दुबारा जब भी कोई उस टॉपिक से कुछ भी पूछे तो सैकण्डों में उत्तर दे दें। पहली बार में हर टॉपिक के कॉन्सेप्ट क्लियर होने पर रिविजन में भी कम समय खर्च करना पड़ेगा। होनहार ने पत्रिका से खास बातचीत में बताया कि सफलता में सबसे अहम रोल दिनचर्या का होता है।

अब लक्ष्य: अच्छा सर्जन बनना

ऑल इंडिया टॉपर गुरुकृपा के महेश ने बताया कि मेरा सपना दिल्ली एम्स में पढ़कर अच्छा सर्जन बन जरूरतमंद लोगों की सेवा करना है। उन्होंने कहा कि जीवन में लक्ष्य कोई भी हो उसके अनुसार आगे बढ़ने वाले को हमेशा सफलता मिलती है।

सीकर से लगाव, गांव की मांटी से सीखा संघर्ष

होनहार ने बताया कि सीकर में आकर पढ़ाई करना काफी महत्वपूर्ण साबित हुआ। यहां के एज्युकेशन सिस्टम की वजह से मुझे शिक्षानगरी से लगाव है। वहीं गांव की माटी से मैंने संघर्ष सीखा जो हर कदम काम आया है।