उज्जैन. ठहरने के लिए न किसी होटल-घर की जरूरत और न कथा वाचन के लिए मंच की आवश्यकता, जहां रुके वहीं सब सुविधाएं मौजूद... यह है महामण्डलेश्वर अवधूत बाबा अरुणगिरी महाराज का बिना ईंट-सीमेंट वाला चलता-फिरता आश्रम। देखने वाले इसे वैनिटी वैन कहते हैं, लेकिन महाराज के लिए यह सिर्फ एक यज्ञ रथ है, जिसका उपयोग वह धर्म प्रचार में करते हैं।
सुविधा और सहूलियत की खासियत के कारण साधु-संतों में भी वैनिटी वैन का उपयोग बढ़ रहा है। ऐसे ही एक महामण्लेश्वर अरुणगिरी महाराज इन दिनों शहर आए हुए हैं। वैसे तो उत्तराखंड ऋषिकेश में उनका स्थायी आश्रम है, लेकिन यज्ञ और धर्म प्रचार के लिए वह जहां भी जाते हैं, उनका यह अस्थायी आश्रम साथ रहता है। बाबा की वैनिटी वैन में मौजूद संसाधन और सुविधाओं के कारण उन्हें अपने धर्म प्रचार व यज्ञ कार्य में काफी सहूलियत मिलती है। यही कारण है कि वह दूरदराज के सफर भी इसी से करते हैं।
महाराज कहते हैं, साधु-संत जहां भी जाते हैं, भक्तों को व्यवस्था जुटाने के लिए परेशान होना पड़ता है। उनके भक्त परेशान न हो इसलिए वह ऐसे निजी वाहन का उपयोग करते हैं, जिसमें उनके दैनिक कार्य संबंधित ज्यादातर सुविधाएं उपलब्ध हैं। आसानी से कहीं अन्यत्र ठहरने की व्यवस्था हो तो ठीक नहीं तो वह भोजन से लेकर सोने तक का कार्य वैन में ही करते हैं। अपने सफर के लिए महाराज करीब ढाई वर्ष से इसी वाहन का उपयोग कर रहे हैं। उज्जैन में व्यवस्था उपलब्ध होने के कारण वह शिवांश के एक घर में ठहरे।
जहां रुके वहीं बन गया आश्रम
अरुणगिरी महाराज ने कहा हमें ईंट-पत्थर के आश्रम में विश्वास नहीं हैं। धर्म प्रचार के लिए वह वैनिटी वैन से दूर-दराज तक जाते हैं। तय नहीं रहता किस गांव में ठहरेंगे। रास्ते में किसी भी ढाबे के नजदीक वाहन रुकवाते और वैन में ही विश्राम करते हैं। कोई परेशानी न हो तो भोजन भी वहीं पकाते हैं। चेले व सेवादारों के लिए भी वैन में बिस्तर है। सुबह नित कार्य के बाद बाबा यज्ञ करते हैं और फिर आगे बढ़ जाते हैं। जिस गांव में रुकते हैं वहां भी उचित स्थान चयन कर यज्ञ करते और ग्रामीणों को इससे जोड़कर धर्म प्रचार करते हैं। वैन में माइक सिस्टम लगा है, जिसके जरिए कथा वाचन करते हैं। वैन से राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, मप्र, उप्र, बिहार, प. बंगाल, ओडिशा व छत्तीसगढ़ धर्म प्रचार किया है। यज्ञ को ही बनाया जीवन- महाराज के अनुसार यज्ञ ही जीवन है और जीवन ही यज्ञ है। यज्ञ से सृष्टी और समाज दोनों का उत्थान होता है। जीवन में जितना यज्ञ को बढ़ावा मिलेगा, कुरीति, विकृति और नकारात्मक ऊर्जा का उतना ही हृास होगा। इस सिंहस्थ में बाबा 1008 कुण्डीय शिवशक्ति महायज्ञ करेंगे। प्रशासन से अनुमति मिलने पर इस यज्ञ में आहुति देने के लिए हेलिकॉप्टर का उपयोग होगा।