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राजस्थान के किसानों की चांदी: रिकॉर्ड स्तर पर जौ के दाम

मौजूदी रबी का सीजन किसानों के लिए अच्छी खबर लेकर आया है। बारले यानी जौ के दाम रिकॉर्ड स्तर पर बने हुए हैं। जौ राजस्थान की प्रमुख फसल है और इसकी राजस्थान सरकार कभी एमएसपी (1635 रुपए प्रति क्विंटल) पर भी खरीद नहीं करती है, क्योंकि इसको राशन (पीडीएस) की दुकानों पर वितरित नहीं किया जाता। इस कारण किसान इसको हमेशा 1300 रुपए क्विंटल या इससे भी कम पर ही बेचते आए हैं। लेकिन इस बार जौ के बाजार भाव 3000 रुपए से अधिक बोले जा रहे हैं...क्या है पूरा मामला...? स्वतंत्र जैन की खास रिपोर्ट

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Barley prices: जौ की कीमतें आसमान पर, जाने क्या हैं फायदे और नुकसान

Barley prices: जौ की कीमतें आसमान पर, जाने क्या हैं फायदे और नुकसान


जयपुर। मौजूदा वित्त वर्ष किसानों (good news for rajasthan farmers) के लिए अच्छी खबर लेकर आया है। मौजूदा रबी फसल के सीजन में रबी (Rabi Season) की पांचों प्रमुख फसलें एमएसपी (Selling Above MSP) से ऊपर बिक रही हैं। विशेषकर राजस्थान के लिए अहम माने जाने वाली रबी की फसल जौ (Barley) के दाम इस साल रिकॉर्ड तोड़ रहे हैं। जौ के बाजार भाव इस समय 3000 से 3200 रुपए क्विंटल के आस-पास चल रहे हैं जो कि एमएसपी से करीब दोगुने हैं। जौ (बारले - Barley) की एमएसपी इस समय 1635 रुपए प्रति क्विंटल है और इसके दाम 3500 का स्तर भी पिछले दिनों छू चुके हैं। जौ के बाजार भाव इसके पहले कभी इतने अधिक नहीं रहे हैं। राजस्थान खाद्य पदार्थ संघ के अध्यक्ष बाबू लाल गुप्ता (Babu lal Gupta) ने बताया कि जौ के बाजार भाव पहले इससे अधिक कभी नहीं रहे हैं। गुप्ता ने बताया कि दामों में उछाल की वजह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बीयर और शराब (Beer and liquor companies buying barley) बनाने वाली कंपनियों द्वारा जौ की खरीद है। गुप्ता ने बताया कि जौ के दामों में उछाल घरेलू डिमांड की वजह से नहीं है। यूक्रेन और रूस (Ukraine Russia War) के बीच युद्ध से शराब निर्माता अब रूस पर प्रतिबंध के कारण वहां से जौ नहीं खरीद रहे हैं और आपूर्ति कम होने से भाव बढ़ गए हैं।

शराब बनाने वाली कंपनियों से आ रही है डिमांड

किसानों के लिए खुशी के बात ये भी है कि फिलहाल रबी की सभी प्रमुख उपजों (Rabi crops) के दाम एमएसपी से ऊपर चल रहे हैं। नीचे दी गई सारणी से साफ है कि इन दिनों रबी की सभी उपजों में सिर्फ कुसुम के दाम एमएसपी से नीचे हैं। सरसों (Mustard) और जौ जैसी उपजों के दाम तो एमएसपी से काफी ऊपर बिक रहे हैं। माना जा रहा है कि फिलहाल इन उपजों के दामों में गिरावट के कोई आसार नहीं हैं।

किसान नेता ने उठाया महंगाई के बाद बचत का सवाल

लेकिन किसान नेता रामपाल जाट का कहना है कि इन दिनों रबी की उपजें एमएसपी से ऊपर जरूर बिक रही हैं लेकिन गौर करने की बात ये है कि महंगाई के कारण किसान की लागत तो बढ़ी ही है इसके अलावा किसान जिन चीजों का उपभोग करता है उनके दामों में बढ़ोतरी उसकी उपज से कहीं अधिक है। इसलिए उपज के दाम अधिक होने के बावजूद किसान के हाथ में ज्यादा कुछ बचेगा नहीं।

उपज एमएसपी बाजार भाव
चना (Gram) 5230 5250 (दिल्ली)
मसूर (Lentil) 5500 5900/6000
सरसों (Mustard) 5050 6700
गेहूं (Wheat) 2015 2200
बारले (Barley) 1635 3200
कुसुम (Kusum) 5441 4000

चना और दालों पर रखना होगा नजर

राजस्थान खाद्य पदार्थ संघ के पूर्व उपाध्यक्ष पुखराज चौपड़ा का कहना है कि अभी ये कहना जल्दबाजी होगी कि अगले 15 दिनों के बाद भी भाव इसी स्तर पर बने रहेंगे। चौपड़ा का कहना है कि अभी बाजार में फसल आना शुरू हुई है और आगे दाम स्थिर रहें तभी बाजार का सही अनुमान लग सकेगा।

वहीं केडिया एडवायजरी के निदेशक अजय केडिया की मानें तो फिलहाल युद्ध के कारण यूक्रेन में बुवाई नहीं हो पा रही है और रशिया से जरूरी जिन्सों की आपूर्ति नहीं हो पा रही है। इसलिए दाम फिलहाल छह माह तक गिरने का आसार नहीं हैं।

दूसरी तरफ पृथ्वी फिनमार्ट के मनोज जैन और प्रो इंटेलीट्रेड सर्विसेज के दिनेश सोमानी की मानें तो आगे चना के दाम 53000 के ऊपर जा सकते हैं। दिल्ली के बाहर अभी भी चना 4600 से 4800 मिल रहा है। इसको खरीद कर भाव बढ़ने का इंतजार करना चाहिए।

लेकिन आईआईएफएल के वाइस प्रेसिडेंट अनुज गुप्ता के अनुसार उन्हें सिर्फ चना ही नहीं सभी दालों के भाव आगे बढ़ते नजर आ रहे हैं।

अजय केडिया और दूसरे विश्लेषकों की मानें तो इस बार बारिश भी बहुत अच्छी होने के आसार नहीं हैं। लेकिन फिलहाल इस बारे में आगे इंतजार करना होगा।