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ग्वालियर में जन्में जावेद अख्तर मना रहें अपना 75 वां जन्मदिन, 1945 में लिया था जन्म

Javed akhtar celebrated 75th birthday born in gwalior : वो नाम है प्रख्यात फिल्म राइटव व लेखक जावेद अख्तर का। जावेद अख्तर का जन्म ग्वालियर में हीं आज से 75 साल पहले हुआ था। उनके परिवार में सभी लोग पढ़े लिखे और संपन्न थे। आज यानि 17 जनवरी को वे अपना 75वां जन्मदिवस मना रहे हैं।

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Javed akhtar celebrated 75th birthday born in gwalior

Javed akhtar celebrated 75th birthday born in gwalior

ग्वालियर। ग्वालियर की धरती का नाता एक से बड़कर एक शख्सियत से जुड़ा हुआ हैै। जिसमें कई बॉलीबुड सेलेब्स, राजनीतिक पर्सन, कलाकार व लेखन से जुड़े हुए लोग हैं। जिनमें अटल बिहारी वाजपई, सलमान खान, कार्तिक आर्यन, मीत ब्रदर्स जैसे नाम शामिल हैं। लेकिन इसमें एक नाम ऐसा भी है जिसके नाम से ही दिमाग में एक फिल्म चलने लगती है। वो नाम है प्रख्यात फिल्म राइटव व लेखक जावेद अख्तर का। जावेद अख्तर का जन्म ग्वालियर में हीं आज से 75 साल पहले हुआ था। उनके परिवार में सभी लोग पढ़े लिखे और संपन्न थे। आज यानि 17 जनवरी को वे अपना 75वां जन्मदिवस मना रहे हैं। जावेद अख्तर, एक ऐसा नाम जो पहचान का मोहताज नहीं, सिर्फ बॉलीवुड ही नहीं, शायर और कवियों के जगत में भी ये सुप्रसिद्ध है। इनकी शायरी जब भी मंच से सुनाई जाती है श्रोताओं और दर्शकों के मुंह से वाह...खुद-ब-खुद निकल पड़ता है। हम आपको बता दें कि जावेद के पिता भी शायरी का शौक रखते थे और बेटा फरहान भी इस मामले में कम नहीं है। शायद ऐसी ही कोई वजह है कि युवाओं के बीच भी जावेद अख्तर खासी पहचान और प्रसिद्धि रखते हैं।

जावेद अख्तर का नाम देश का बहुत ही जाना-पहचाना नाम हैं। जावेद अख्तर शायर, फिल्मों के गीतकार और पटकथा लेखक तो हैं ही, सामाजिक कार्यकर्त्ता के रूप में भी एक प्रसिद्ध हस्ती हैं। इनका जन्म 17 जनवरी 1945 को ग्वालियर में हुआ था। वह एक ऐसे परिवार के सदस्य हैं जिसके ज़िक्र के बिना उर्दु साहित्य का इतिहास अधुरा रह जायगा। शायरी तो पीढियों से उनके खून में दौड़ रही है। पिता जान निसार अख़्तर प्रसिद्ध प्रगतिशील कवि और माता सफिया अख़्तर मशहूर उर्दु लेखिका तथा शिक्षिका थीं। ज़ावेदजी प्रगतिशील आंदोलन के एक और सितारे लोकप्रिय कवि मजाज़ के भांजे भी हैं। अपने दौर के प्रसिद्ध शायर मुज़्तर ख़ैराबादी जावेद जी के दादा थे। पर इतना सब होने के बावजूद जावेद का बचपन विस्थापितों सा बीता। छोटी उम्र में ही माँ का आंचल सर से उठ गया और लखनऊ में कुछ समय अपने नाना-नानी के घर बिताने के बाद उन्हें अलीगढ अपने खाला के घर भेज दिया गया। जहां के स्कूल में उनकी शुरूआती पढाई हुई।

वालिद ने दूसरी शादी कर ली और कुछ दिन भोपाल में अपनी सौतेली माँ के घर रहने के बाद भोपाल शहर में उनका जीवन दोस्तों के भरोसे हो गया। यहीं कॉलेज की पढाई पूरी की और जिन्दगी के नए सबक भी सीखे। नवाबों की नगरी ने जावेद के शौक का और आगे बढ़ा दिया। बचपन की तकलीफों से भरे दिल में धीरे-धीरे दर्द शायरी के रूप में उभरने लगा। जावेद साहब पहले सिर्फ फिल्मों की कहानी लिखते थे। यश चोपड़ा ने उन्हें सिलसिला फिल्म में गीत लिखने का मौका दिया और जावेद अख्तर की शायरियों को डायरी के पन्नों से बाहर आने का मौका मिला। इस फिल्म के गीतों ने इतिहास रच दिया और जावेद अख्तर एक बड़ा नाम बनकर इस क्षेत्र में उभर आया।बीते जमाने की फिल्म अभिनेत्री शबाना आजमी जावेद की दूसरी पत्नी हैं।

मुज्तर खैराबादी जावेद अख्तर के दादा थे

मुज़्तर खैराबादी जन्म खैराबाद में 1862 में हुआ। कुछ लोग 1856 व 1865 भी बताते हैं। उनके बारे में बताया जाता है कि अल्लामा फ़ज़ले-हक़ खैराबादी भारतीय अध्येता, दार्शिनक, तर्कशास्त्री और अरबी के शायर थे। उन्हें 1857 के स्वाधीनता संग्राम में लोगों का नेतृत्व करने के जुर्म में अंग्रेजों ने काला पानी की सज़ा दी और उनकी वहीं मृत्यु भी हो गई।बताया जाता है कि मुज्तर साहब का 20 मार्च 1927 को उनका ग्वालियर में इंतकाल हो गया। उन्होंने होल्कर रियासत में इतिहास लिखने का भी कार्य किया।