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पदोन्नति को सीधी भर्ती में बदलना नियमों के खिलाफ, एमपी हाईकोर्ट का अहम फैसला

Promotion- पदोन्नति के लिए स्पष्ट और पारदर्शी मूल्यांकन प्रक्रिया तय करने की आवश्यकता जताई।

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प्रोफेसर पद की भर्ती पर हाईकोर्ट का झटका, इन-हाउस विज्ञापन रद्द

प्रोफेसर पद की भर्ती पर हाईकोर्ट का झटका- demo pic

Promotion- पदोन्नति के संबंध में एमपी हाईकोर्ट का अहम फैसला सामने आया है। हाईकोर्ट ने प्रमोशन के लिए निर्धारित पद को सीधी भर्ती में बदलने को अनुचित करार दिया है। इसे नियमों के खिलाफ बताते हुए प्रोफेसर पद की भर्ती पर इन-हाउस विज्ञापन रद्द कर दिया। हाईकोर्ट की ग्वालियर बैंच ने यह फैसला दिया। ग्वालियर के गजराराजा मेडिकल कॉलेज (जीआरएमसी) ऑर्थोपेडिक्स विभाग के प्रोफेसर पद के लिए जारी इन-हाउस भर्ती विज्ञापन को हाईकोर्ट ने अवैध मानते हुए निरस्त कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि पदोन्नति (प्रमोशन) के लिए निर्धारित पद को बिना तय प्रक्रिया के सीधे भर्ती में बदलना नियमों के खिलाफ है। कोर्ट ने पदोन्नति के लिए स्पष्ट और पारदर्शी मूल्यांकन प्रक्रिया तय करने की आवश्यकता भी जताई।

डॉ. आशीष कौशल ने 6 फरवरी 2026 के विज्ञापन को चुनौती दी थी। वे वर्ष 2005 से कॉलेज में कार्यरत हैं और 2013 से एसोसिएट प्रोफेसर पद पर सेवाएं दे रहे हैं। याचिकाकर्ता डॉ. आशीष कौशल का कहना था कि मध्यप्रदेश स्वायत्त मेडिकल एवं डेंटल कॉलेज शैक्षणिक सेवा नियम, 2018 के अनुसार यह पद पदोन्नति से भरा जाना चाहिए, लेकिन कॉलेज ने सीधे भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी, जिससे उनके अधिकार प्रभावित हुए।

वहीं, कॉलेज प्रशासन की ओर से तर्क दिया गया कि पदोन्नति में कानूनी अड़चन (आरक्षण से जुड़े मामले लंबित) के कारण अस्थायी रूप से इन-हाउस डायरेक्ट भर्ती का विकल्प अपनाया गया है। इससे याचिकाकर्ता को कोई नुकसान नहीं होगा क्योंकि प्रक्रिया पहले केवल आंतरिक उम्मीदवारों तक सीमित है।

डायरेक्ट भर्ती में फीडर कैडर के अनुभव को पर्याप्त महत्व नहीं मिलता, जिससे पात्र उम्मीदवारों के अधिकार प्रभावित होते हैं

कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद पाया कि संबंधित पद मूल रूप से पदोन्नति से भरा जाना है और अब तक पदोन्नति के लिए कोई स्पष्ट प्रक्रिया भी निर्धारित नहीं की गई है। ऐसे में बिना प्रक्रिया तय किए पद को सीधे भर्ती में बदलना अनुचित है। साथ ही, डायरेक्ट भर्ती में फीडर कैडर के अनुभव को पर्याप्त महत्व नहीं मिलता, जिससे पात्र उम्मीदवारों के अधिकार प्रभावित होते हैं।

कोर्ट ने यह भी कहा कि पहले पदोन्नति के लिए स्पष्ट और पारदर्शी मूल्यांकन प्रक्रिया तय करना आवश्यक

कोर्ट ने यह भी कहा कि पहले पदोन्नति के लिए स्पष्ट और पारदर्शी मूल्यांकन प्रक्रिया तय करना आवश्यक है। बता दें कि ग्वालियर हाईकोर्ट ने नौकरी में आरक्षण पर भी अहम फैसला सुनाया। कोर्ट ने दूसरे राज्य का OBC प्रमाणपत्र अमान्य किया और कहा कि राज्य बदलने से जाति नहीं बदलेगी।