
में 52 साल बाद कोई भारतीय जिम्नास्ट भाग ले रहा है, वह भी महिला। पुरुष जिम्नास्ट तो इससे पहले ओलंपिक में भाग ले चुके हैं, लेकिन ऐसा करने वाली दीपा कर्माकर पहली भारतीय महिला हैं। उन्होंने रियो ओलंपिक में वॉल्ट के फाइनल में जगह बना ली है। तमाम संघर्षों और आर्थिक तंगी का सामना करने के बाद दीपा इतिहास रचने से मात्र एक कदम दूर हैं। दीपा ने जब पहली बार किसी जिमनास्टिक प्रतियोगिता में हिस्सा लिया तब उनके पास जूते भी नहीं थे। प्रतियोगिता के लिए कॉस्ट्यूम भी उन्होंने किसी से उधार मांगा था, जो उन पर पूरी तरह से फिट भी नहीं हो रहा था।
फाइनल में पहुंचने वाली देश की पहली महिला
ग्लासगो में खींचा ध्यान
दरअसल दीपा ने ग्लासगो वल्र्ड चैंपियनशिप, 2015 में सभी प्रतिभागियों के बीच सबसे कठिन स्तर (7.000) वाला प्रॉडुनोवा वॉल्ट करके सबका ध्यान अपनी ओर खींचा था। हालांकि वह इसको सफलतापूर्वक पूरा करने में विफल रहीं, क्योंकि उनका निचला भाग मैट को छू गया।
प्रॉडुनोवा वॉल्ट इतना मुश्किल कि अब तक 5 जिम्नास्ट ही कर पाईं
जिम्नास्टिक्स का सबसे मुश्किल प्रॉडुनोवा वॉल्ट करने के बारे में कम खिलाड़ी सोचते हैं। विश्व में पांच महिलाएं ही सफल हो पाई हैं। रूस की येलेना प्रोडुनोवा ने पहली बार 1999 में किया था तब से इसे प्रॉडुनोवा वॉल्ट कहा जाने लगा। डॉमिनिक रिपब्लिक की यामिलेट पिन्या, इजिप्ट की फद्वा महमूद, उज्बेकिस्तान की ओक्साना चुजोवितिना और भारत की दीपा ने भी यह किया है।
फ्लैट तलवे जिम्नास्ट में अच्छे नहीं...मिथक टूटा
दीपा कर्माकर ने महज 6 साल की उम्र से ही जिम्नास्टिक्स का अभ्यास शुरू कर दिया था। उनके लिए जिम्नास्टिक्स को अपनाना शुरू से ही आसान नहीं रहा, क्योंकि उनके तलवे फ्लैट थे, जो जिम्नास्टिक्स के लिए अच्छे नहीं माने जाते। इसके बावजूद दीपा ने कठिन परिश्रम किया।
जब मैंने वॉल्ट करना शुरू किया, तो मेरे कोच (बिश्वेश्वर नंदी) डरे हुए थे। उन्हें लगता था कि मैं अपनी गर्दन तोड़ बैठूंगी या मर जाऊंगी। लेकिन मैं उतावली थी और मैंने इसे करके ही दम लिया।
पिछले साल ग्लासगो के बाद कहा।
Published on:
09 Aug 2016 08:30 am

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