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खेत उगल रहे बम, अटकी रहती की सासें- पाकिस्तान सीमा से लगे खेतों में ‘बम की फसल’!

- चौदह साल में पांच दर्जन से ज्यादा बम

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खेत उगल रहे बम, अटकी रहती की सासें- पाकिस्तान सीमा से लगे खेतों में 'बम की फसल'!

खेत उगल रहे बम, अटकी रहती की सासें- पाकिस्तान सीमा से लगे खेतों में 'बम की फसल'!

महेंद्र सिंह शेखावत

श्रीगंगानगर. खेत में जुताई के समय कब बम निकल आए और धमाका हो जाए, इसी आशंका में किसानों की सांसें हलक में अटकी रहती हैं। यह कड़वी हकीकत प्रदेश के उन किसानों से जुड़ी है, जो पाक सीमा से लगते क्षेत्र में खेती करते हैं। सरहदी क्षेत्र में सैन्य गतिविधियों के चलते जमीन में दफन बमों का गाहे-बगाहे सामने आना आम बात है।

विशेषकर श्रीगंगानगर जिले के राजियासर थाना क्षेत्र के रायांवाली रोही व सूरतगढ़ सिटी थाना क्षेत्र के राजपुरा पीपेरन क्षेत्र में बीते चौदह साल में पांच दर्जन से ज्यादा बम सामने आ चुके हैं। इनमें हाल ही में नहरबंदी के दौरान इन्दिरा गांधी नहर की मुख्य नहर व इससे निकलने वाली नहरों से मिले दस बम भी शामिल हैं।

बीकानेर में पिछले दस सालों में 17 जबकि बाडमेर में तीन बम मिल चुके हैं। विदित रहे कि सूरतगढ़ क्षेत्र में सेना के आयुध डिपो में 24 मई 2001 को भीषण आगजनी हुई थी। इससे बड़ी संख्या में बम करीब आठ किलोमीटर के दायरे में बिना चले ही गिर गए थे। बम मिलने की सूचना पर इनको निष्क्रिय करने के लिए सेना की विशेष टीम आती है। बमों के स्थायी समाधान के लिए क्षेत्र में सर्च अभियान की मांग भी उठती रही है।


पोकरण फिल्ड फायरिंग रेंज क्षेत्र में भी कई बार बिना फटे बम हादसे का सबब बन जाते हैं। रेंज की स्थापना के बाद पुराने रास्तों पर आवागमन प्रतिबंधित कर दिया गया, लेकिन आज भी यहां चोरी-छिपे आवागमन होता है। रेंज का काफी हिस्सा गांवों से भी लगता है।

पशुपालक अपने पशुओं को यहां चराने के लिए लेकर जाते है। युद्धाभ्यास या किसी परीक्षण के दौरान कई बार तोप से निकला बम व बंदूक से निकली गोलियां रेत में धंस जाते हैं। चरवाहे व अन्य लोग रेंज क्षेत्र से स्क्रेप के बहाने कई बार बम उठा लाते हैं जिनमें विस्फोट हो जाता है।


जानमाल का नुकसान
-श्रीगंगानगर के पटीर नामक बालक की 12 सितम्बर 2013 को खेत में बकरियां चराते हुए मिले मोर्टार बम को तोडऩे के प्रयास में जान गई।


-जैसलमेर में 6 मई 2020 की रात रेंज से तीन युवकों ने भी स्क्रेब के बहाने बम उठा लिया और खोलने के प्रयास में तीनों की जान चली गई।


-जैसलमेर जिले में ही 6 दिसंबर 2020 को दो बच्चों ने अज्ञानतावश बम को उठा लिया। उसे खोलने के प्रयास में एक बालक की मौत हो गई।


- 22 अगस्त 2021 खेतोलाई गांव के खेत में दो दर्जन से अधिक निष्क्रिय बम के खोल मिलने से भी सनसनी फैल गई थी।


- 2015 में बाडमेर के चांदे का पार गांव में एक बमनुमा वस्तु से खेत में विस्फोट से एक बच्चा घायल हुआ।

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