
ऐसे हालात रहे तो सेना के हवाले हो जाएगा शहर
श्रीगंगानगर.
इलाके में बरसात ने दस्तक दे दी है, पिछले सप्ताह दो दिन बरसात भी हो चुकी है। शहर में बरसाती पानी की निकासी की जमीनी हकीकत से शहरवासी अच्छी तरह वाकिफ हैं। महज 18 मिलीमीटर की बरसात के बावजूद पुरानी आबादी एरिया में पानी निकासी के लिए परिषद अमले को दो दिन लग गए। यहां तक कि सीसी रोड खोद कर पानी निकासी करवानी पड़ी।
ऐसी स्थिति में मूसलाधार बारिश होती है तो शहर में पानी की निकासी के लिए सेना बुलानी की नौबत आ सकती है। खुद सभापति अजय चांडक भी ऐसी स्थिति को स्वीकार करते हैं। चांडक के अनुसार शहर के चारों ओर पानी निकासी के लिए बनाए गड्ढों को परिषद के पूर्व सभापतियों के कार्यकाल में अतिक्रमण की छूट ने जल भंडारण का स्रोत ही खत्म कर दिया। ऐसे में पानी कहां और कैसे निकलेगा, यह सबसे बड़ी चुनौती है।
इसके विपरीत नगर विकास न्यास अध्यक्ष संजय महिपाल ने दावा किया है कि एसटीपी के माध्यम से पानी निकासी में कोई अड़चन नहीं आएगी। पानी को झेलने के लिए शहर सक्षम है। पानी निकासी के लिए मुख्य नाले है, इन्हें साफ कराने से पानी निकासी बहाल हो जाएगी। उन्होंने नालों को साफ कराने का दावा भी किया। लेकिन वास्तविकता यह है कि जगह-जगह नाले सिल्ट से अटे हुए हैं।
कचरा जितना सड़क पर उतना नालों में
पुरानी आबादी में वार्ड तीन से 49 तक शुगर मिल के पास गड्ढे तक करीब चौबीस किमी का सफर तय करने के बाद शहर से बाहर जाने वाले गंदे पानी के लिए बने मुख्य नालों की हालत इतनी अच्छी नहीं है जितने दावे किए जा रहे हैं। परिषद हो या न्यास दोनों के मुख्य नालों में इतना कचरा है जितना सड़कों पर रहता है। सफाई होने के बाद मिट्टी सीधे नालियों और नालों में डाल दी जाती है, इसकी वजह से नाले बार-बार जाम रहते हैं। मटका चौक के पास रवीन्द्र पथ पर मुख्य नाले का उदाहरण के तौर देखा जाएं तो यह नाला कभी साफ नहीं होता। यही हाल शहर के हर क्षेत्र के मुख्य नालों का है। शहर में नगर परिषद के 40 और नगर विकास न्यास के 15 मुख्य नाले हैं। न्यास अपने क्षेत्र के नालों को साफ करवाता है और परिषद अपने स्तर या ठेकेदार से इन नालों को साफ कराने का दावा करती है।
Published on:
12 Jun 2018 07:18 am

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