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श्रीगंगानगर जिला अस्पताल में लैब लपकों ने बिछाया जाल

- फिमेल मेडिकल वार्ड में ब्लड की जांच करने आया तो किया काबू, मचा हंगामा

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श्रीगंगानगर। जिला अस्पताल में फिर से लपके सक्रिय हो गए है। रोगियों की ब्लड, यूरिन आदि की जांच कराने के लिए प्राइवेट लैब के लपके सरेआम अस्पताल के वार्डो में आवाजाही कर रहे है। मोटा शुल्क लेकर जरुरतमंद परिवारों के भर्ती रोगियोें को ठग रहे है। हैरानी की बात तो ऐसे लपके सरकारी अस्पताल की लैब की पर्ची पर जांच भी खुद ही लिखते हैं और डॉक्टर के हस्ताक्षरों की भी जरूरत नहीं होती। इस खेल में कई चिकितसक और नर्सिग स्टाफ भी शामिल होने के संकेत मिले है। एक प्राइवेट लैब का लपका जिला चिकित्सालय के फिमेल मेडीकल वार्ड में आया और खुद ही वहां नर्सिग स्टाफ की मेज पर रखी खून व अन्य जांचों की पर्ची पर अपने पैन से अंकित किया और रोगी का ब्लड लेकर जांच करने के लिए चला गया। इस लपके की वीडियो बनाकर जब वायरल हुई तो जिला चिकित्सालय में हंगामा हो गया। पीएमओ डा. दीपक मोंगा ने बताया कि इस लपके को काबू कर उसी समय संबंधित लैब संचालक को तलब किया। लैब संचालक का कहना था कि उसका रिश्तेदार भर्ती था। उसकी जांच करने के लिए सहायक कार्मिक को भेजा था। पीएमओ ने हिदायत देकर उसे छोड़ दिया। विदित रहे कि मुख्यमंत्री निशुल्क दवा योजना से पहले मेडिकल स्टोर के लपके रोगियों को बरगलाकर प्राइवेट दुकानों से दवा खरीदने को मजबूर करते थे। इस बीच, पीएमओ मोंगा ने आदेश जारी किए है। इसमें मुख्यमंत्री निशुल्क निरोगी राजस्थान जांच योजना के बेहतर संचालन के लिए जिला चिकित्सालय में सुबह 8 बजे से दोपहर 2 बजे तक सैम्पल लेकर जांच रिपोर्ट उपलब्ध करवाने, चिकित्सा अधिकारी प्रभारी पैथोलॉजी व टैक्नीशियन प्रभारी लैब की निर्देश दिए गए है। वार्डो के संबंधित चिकित्सकों को निर्देश दिए गए है कि रोगी की जांच अस्पताल में ही कराएं। बाहर से जांच नहीं होगी। यदि रोगी ज्यादा गंभीर या ज्यादा जरूरत होने पर संबंधित चिकित्सा अधिकारी की अनुमति के उपरांत ही बाहर से जांच हो सकेगी। बाहर से जांच के लिए वार्ड प्रभारी और चिकित्सक के नाम वाली मुहर और साइन होने जरुरी है।
अब लपकों की नो एंट्री
पीएमओ मोंगा ने बताया कि फिमेल मेडिकल वार्ड में प्राइवेट लैब का एक लपका काबू में आया है। चेतावनी देकर उसे छोड़ दिया गया है। वार्ड प्रभारियों को विशेष हिदायत दी गई है कि ऐसे लपके दिखाई दे तो उसकी सूचना तत्काल उन्हें या उपनियंत्रक को देनी चाहिए। चिकित्सालय में ऐसे लपकों की नो एंट्री है। अब चिकित्सालय कैम्पस में लपकों की नो एंट्री के साइन बोर्ड लगाए जाएंगे। जहां भी ऐसे लपके मिलते है या दिखाई देते है तो संबंधित के खिलाफ एफआइआर करवाएंगे।

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