श्रीगंगानगर.जिले में 342 ग्राम सेवा सहकारी समितियों के तहत 128 मिनी बैंक संचालित हो रहे हैं। इनमें ग्रामीणों के करीब 240 करोड़ रुपए बचत और स्थाई जमा खातों में जमा है। हाल ही में ग्राम सेवा सहकारी समितियों में फर्जीवाड़े के मामले और शिकायतें सामने आई हैं। घोटालों- शिकायतों ने ग्रामीणों का विश्वास हिलाकर रख दिया है। जैतसर क्षेत्र की ग्राम सेवा सहकारी समिति दो जीबी ए के तीन जीबी मिनी बैंक में हुआ फर्जीवाड़ा का इसका एक बड़ा उदाहरण है। इस मिनी बैंक से 8.97 करोड़ रुपए का गबन हो गया। ऐसी घटनाएं स्थानीय समितियों की लापरवाही और प्रशासनिक निगरानी का अभाव दर्शाती है।
निरीक्षण के नाम पर खानापूर्ति
मिनी बैंकों का संचालन समितियों के व्यवस्थापक के जिम्मे है। वित्तीय लेन-देन की पूरी जिम्मेदारी व्यवस्थापकों की होती है। स्थानीय शाखा प्रबंधकों को छहमाही निरीक्षण करना होता है। अब तक का रिकॉर्ड बताता है कि निरीक्षण में केवल खानापूर्ति होती है। निरीक्षण में केवल रिपोर्ट देखी जाता है, जिससे वास्तव में वित्तीय लेन-देन की जानकारी नहीं होती।
आखिर गड़बड़ी है कहां ?
विभागीय अधिकारियों का दावा है कि बैंकिंग संचालन की नियमित जांच और ऑडिट की जा रही है। बावजूद इसके ऐसी गंभीर गड़बडिय़ों के मामले सामने आ रहे हैं। बड़ा सवाल यह है कि सिस्टम में कोई कमी है या जिम्मेदार अधिकारी लापरवाह है। घोटाले के बाद दी गंगानगर केंद्रीय सहकारी बैंक के प्रबंध निदेशक ने श्रीगंगानगर के 128 मिनी बैंकों के शाखा प्रबंधकों को निरीक्षण कर रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं।
जमा राशि की चिंता
इन मिनी बैंकों में हुए घोटालों ने ग्रामीणों को चिंता में डाल दिया है। उपभोक्ता अपनी जमा राशि को लेकर चिंतित हैं और कुछ लोग जमा पूंजी निकालने का मानस बना रहे हैं।
फैक्ट फाइल
दी गंगानगर केंद्रीय सहकारी बैंक: 01
दी गंगानगर केंद्रीय सहकारी शाखा बैंक: 22
ग्राम सेवा सहकारी समितियां: 342
मिनी बैंक: 128
मिनी बैंक में जमा राशि:240 करोड़
इनका कहना है
श्रीगंगानगर-अनूपगढ़ जिले में 128 मिनी बैंक संचालित किए जा रहे हैं। इनमें बचत राशि की पूरी जिम्मेदारी समिति व्यवस्थापक की होती है। इनका निरीक्षण स्थानीय शाखा प्रबंधकों के माध्यम से छह माह में एक बार करना होता है। गड़बडिय़ों पर अंकुश लगाया जा रहा है।संजय गर्ग, एमडी, दी गंगानगर केंद्रीय सहकारी बैंक, श्रीगंगानगर ।