
चुआं से पानी पीने को मजबूर हैं आदिवासी
Water problem: ब्रांडेड मिनरल वाटर के लिए जब आप 20 रुपए खर्च कर रहे हों तो इस तस्वीर और खबर को याद करेंगे। याद इसलिए करेंगे क्योंकि इस देश में एक इलाका ऐसा भी है जहां शहरों की तरह सुविधाएं अब तक नहीं पहुंची हैं। शहरों की तरह सुविधाएं छोड़ भी दें तो मुलभूत सुविधाओं के लिए भी ग्रामीण संघर्ष कर रहे हैं। तस्वीर बस्तर संभाग के सुकमा जिले से सामने आई है। इसमें एक आदिवासी महिला चुंआ (जमीन पर खोदा गए गड्ढ़े ) से पानी निकालने के लिए संघर्ष करती दिख रही है।
चुआं के पानी से प्यास बुझाने के लिए मजबूर
सुकमा जिले के छिंदगढ़ ब्लॉक में ओलेर के सीतापाल गांव में ग्रामीण चुआं के पानी से प्यास बुझाने के लिए मजबूर हैं। गांव में अधिकांश हैंडपंप या सूख गए हैं या मुश्किल से पांच से दस मिनट ही पानी दे पाते हैं। गांव में करीब 9 हैंडपंप हैं, जिसमें से सात चालू हालत में है और दो खराब बताए जा रहे हैं।
ग्रामीणों ने बताया कि हर साल गर्मी में गांव के अधिकांश हैंडपंपों से पर्याप्त पानी नहीं निकलता है, जिसे देखते हुए गांव के आसपास के जल स्रोतों के किनारे से चुआं खोदकर पानी की व्यवस्था करते हैं। सीतापाल गांव में 131 घर और आबादी 523 है।
खानापूर्ति के लिए लगाए जाते हैं हैंडपंप
जिस तरह से सीतापाल में ग्रामीण पानी के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उसी तरह से जिले दुलेड, कावापाल सहित बाकी के हिस्सों में भी ग्रामीण पानी के लिए तरसते नजर आते हैं। सरकारी हैंडपंप समय से पहले कबाड़ हो जाते हैं। उन्हें सिर्फ खानापूर्ति और बजट को खर्च करने के लिए लगाया जाता है।
हैंडपंप लगाने की रस्म अदायगी के बाद इसका खमियाजा ग्रामीणों को भुगतना पड़ता है। अंदरुनी इलाके के स्कूलों और छात्रावासों में भी लगाए गए हैंडपंप के खराब होने की खबरें सामने आती हैं। तब स्कूली बच्चे भी पीने के पानी के लिए सघर्ष करते नजर आते हैं।
समस्या का निराकरण करवाया जाएगा
इस मामले में जनपद पंचायत छिंदगढ़ के सीईओ एस.एल. देवांगन ने कहा, गांव में इस तरह की समस्या है तो पहले समस्या को दिखवा लेता हूं, उसके बाद जो भी संभव होगा किया जाएगा। ग्रामीणों की समस्या का निराकरण जरूर करेंगे।
Published on:
10 Dec 2022 02:07 pm

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