
Stop child marriage
रामानुजनगर. बाल विवाह को एक सामाजिक अभिशाप बताकर शासन-प्रशासन के निर्देश पर महिला बाल विकास विभाग द्वारा जनजागृति लाने की पहल की जा रही है। सोमवार को जिला बाल संरक्षण अधिकारी के नेतृत्व में संयुक्त टीम ने सूचना मिलने पर सूरजपुर जिले के रामानुजनगर क्षेत्र के ग्रामों में कुल 8 बाल विवाह रोक कर परिजन को समझाइश दी। टीम को कई जगह नाबालिग दुल्हनों के माता-पिता ने गुमराह करने का भी प्रयास किया।
इस दौरान एक घर में नाबालिग की जगह दूसरी लड़की को खड़ा किया गया तो दूसरी जगह चादर ओढ़ाकर छिपाने का प्रयास किया। दरवाजे पर अचानक अधिकारियों की दस्तक से नाबालिग बेटे-बेटियों की शादी करने वाले परिजनों में हड़कंप मच गया।
रामानुजनगर विकासखंड अंतर्गत ग्राम गोकुलपुर में एक, बरहोल में एक व ग्राम पंचायत केशवपुर में 6 समेत कुल 8 बाल विवाह टीम ने रोके। संयुक्त टीम ने जब इन घरों में पहुंचकर दस्तावेजों का परीक्षण किया तो सभी नाबालिग पाए गए। इनका 18 अप्रैल अक्षय तृतीया के दिन विवाह होना था।
टीम ने लड़की-लड़के के माता-पिता व अन्य परिजन को समझाइश देते हुए बाल विवाह के लिए बने कानून की विस्तार से जानकारी दी। टीम ने बताया कि बाल विवाह करना कानूनन अपराध है, इसके दोषियों को सजा के साथ ही अर्थदंड का भी प्रावधान है। संपूर्ण जानकारी देने के बाद लड़के-लड़की के परिजन मान गए और कहा कि जब तक बच्चे बालिग नहीं हो जाते, वे विवाह नहीं करेंगे।
जिला बाल संरक्षण अधिकारी ने बताया कि कुछ जगह पर तो जांच के दौरान परिजन ने जिस नाबालिग लड़की की शादी होने वाली थी, उसकी जगह दूसरी लड़की को टीम के सामने खड़ा कर गुमराह करने की कोशिश की। वहीं एक जगह तो परिजन लड़की को चादर ओढ़ाकर छिपाने का प्रयास किया, लेकिन जांच में हकीकत उजागर हो गई।
कार्रवाई में जिला बाल संरक्षण अधिकारी मनोज जायसवाल, अखिलेश सिंह, अंजनी साहू, ललिता जायसवाल, बालविंदर सिंह, पवन धीवर, अल्पना तिर्की, हीरालाल साहू व अन्य कर्मचारी शामिल रहे।
Published on:
17 Apr 2018 01:39 pm
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