पूर्व जासूसी एजेंसी कॉन्ट्रेेक्टर एडवर्ड स्नोडन द्वारा सर्वेेलांस प्रोग्राम का खुलासा करने के बाद से ही सरकार द्वारा टेलिफोन और वेब कंपनियों से यूजर डेटा मांगना और हटवाना विवादों में रहा है। इसे यूजर की निजता में दखलअंदाजी माना जाए या नहीं, इस पर तीखी बहस रही है।
फेसबुक की बाई-ऐनुअल रिपोर्ट सरकार की ओर से जारी रिपोर्ट में बताया कि 2014 की दूसरी छमाही में सरकार ने अकाउंट डेटा के लिए 35,051 रिक्वेस्ट्स की थी। जबकि 2015 की पहली छमाही में ही यह संख्या 18 फीसदी से बढ़कर41,214 पर पहुंच गई है।
इस साल की पहली छमाही में फेसबुक ने 20,568 पोस्ट्स और कॉन्टेंट हटाया गया है जिससे स्थानीय कानूनों का उल्लंघन होता है। यह पिछले साल के आखिरी छह महीनों के आंकड़े के दोगुने से ज्यादा है।
इस तरह के कॉन्टेंट में जर्मनी नाजी प्रॉप्रगंडा से लेकर हिंसक अपराध का चित्रण भी शामिल है। पिछले साल फेसबक का यूजर बेस 140 करोड़ था अब तेजी से बढ़कर 155 करोड़ हो गया है। सरकारें आमतौर पर बेसिक सब्सक्राइबर इन्फ र्मेशन, आईपी अड्रेेस या अकाउंट कॉन्टेंट मांगती हैं जिन में लोगों की ऑनलाइन पोस्ट्स भी शामिल है।

सरकारी मांगों में सबसे ज्यादा यूएस की कानूनी एजेंसियों से आई है। यूएस एजेंसियों ने 26,579 अकाउंट्स का डेटा मांगा है। यह कुल डेटा की मांगोंं का 60 फीसदी है।

फ्रांस, जर्मनी और ब्रिटेन ने भी बहुत ज्यादा रिक्वेस्ट की है और 2015 में ढ़ेर सारे कॉन्टेंट को हटवाया है। फेसबुक ने बताया कि जर्मनी में हटवाए गए काफी सारे कॉन्टेंट का संबंध होलोकॉस्ट डिनायल से था।