मेवाड़ के प्रात: स्मरणीय भगवान जगदीश मंदिर के निर्माण के 28 साल बाद जनवरी 1680 में मुगल शासक औरंगजेब के आदेश पर उसकी सेना ने बदनीयती से मंदिर पर हमला किया था।
मेवाड़ के प्रात: स्मरणीय भगवान जगदीश मंदिर के निर्माण के 28 साल बाद जनवरी 1680 में मुगल शासक औरंगजेब के आदेश पर उसकी सेना ने बदनीयती से मंदिर पर हमला किया था। हमलावार मंदिर को तोडऩा चाहते थे, लेकिन वीरों की धरा के सैनिकों ने मुगलों की सेना को मुहं तोड़ जवाब देकर उनका प्रयास विफल कर दिया था। तब महाराणा राज सिंह के शासनकाल में मंदिर के सम्मान और उसकी रक्षा में 20 सैनिक शहीद हो गए थे।
यह जानकारी हाल में बीकानेर संग्रहालय में सुरक्षित मिले मूल फरमानों में सामने आई है। यह भी गौरव की बात है कि इसी वर्ष जगदीश मंदिर को 365 साल पूरे हो रहे हैं। जानकारी के अनुसार फारसी भाषा में मुहर के साथ लिखे इन फरमानों के 20वें और 21वें क्रमांक में उल्लेखित किया गया है कि औरंगजेब ने रूहिल्ला खान और यकाताज खान के नेतृत्व में मंदिर को तोडऩे के लिए सेना भेजी थी। लेकिन मंदिर के साथ मेवाड़ के अन्य भागों में आक्रमण करना भी औरंगजेब की सेना को भारी पड़ा और उनको पराजय झेलनी पड़ी। सिर्फ हसनअली खान के नेतृत्व में औरंगजेब की सेना मेवाड़ के बाहरी भागों पर आक्रमण कर लूटपाट कर पाई।
मुगल सेना 29 जनवरी 1680 को लूट की सामग्री को 20 ऊंटों पर लेकर गई और औरंगजेब को बतौर नजराना पेश किया। इस दौरान मुगलों ने मेवाड़ के समीपवर्ती भागों में 172 मंदिर नष्ट किए। औरंगजेब ने 9 अप्रेल 1669 को मंदिरों को ध्वस्त करने का आदेश सुनाया था। इसके बाद से मुगलों ने मंदिरों को तहस-नहस करना शुरू किया था। इसी कारण वल्लभ संप्रदाय के पीठाधीश्वर ने भगवान श्रीनाथजी को बृज के गोवर्धन से लाकर मेवाड़ में सुरक्षित किया था।