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चारों ओर बनाई मढ़ी, 52 सदस्य करेंगे निशान की सेवा

चार मढ़ी की खासियत- अखाड़े के वैसे तो पांच मढ़ी होते हैं, जिसमें 52 सदस्य होते हैं। जिसमें 16 मढ़ी पुरियों की, 27 मढ़ी गिरियों की जिसमें 13 व 14 दो भाग में मढ़ी विभाजित हैं। 4 मढ़ी वन की और 1 मढ़ी लामा गुरु की, जो चीन में स्थापित है।

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Feb 23, 2016

उज्जैन. सिंहस्थ के लिए अवंतिका नगरी में आए श्री पंचदशनाम आवाहन अखाड़े की रमता पंच की चार मढ़ी अपने निशान देवता के चारों ओर मढ़ी स्थापित कर बैठ चुकी है। नीलगंगा हनुमान मंदिर स्थित बने पड़ाव स्थल पर रविवार को प्रवेश करने के बाद अखाड़े के पंच ने सोमवार सुबह 5 बजे अपने निशान देवता गणेश प्रकाश का पूजन अर्चन विधिवत रूप से किया। मध्य में स्थापित किए गए मंदिर में इष्टदेव गणेश, हनुमान और दत्रात्रेय महाराज विराजित किए गए। इनके चारों ओर पंच की चार मढ़ी 52 सदस्यों के साथ 10 अप्रैल तक पूजन, पाठ और साधना में लीन रहेगी।

आद्य गुरु शंकराचार्य की ओर से 547 ईस्वी में सबसे पहले सरकार अखाड़े के नाम से पहचान रखने वाले श्री पंचदशनाम आवाहन अखाड़े की स्थापना की थी। अखाड़े में निशान देवता गणेश प्रकाश की पूजन पाठ और अखाड़े को संचालित करने के लिए रमता पंच बनाया गया। यह पंच सिंहस्थ महापर्व के साथ आश्रम में भी इस निशान देवता का पूजन पाठ करता है। अखाड़े के कोषाध्यक्ष श्रीमहंत कैलाशपुरी महाराज व महामंत्री श्रीमहंत सत्यगिरि महाराज ने बताया कि अखाड़े के आचार्य पीठाधीश्वर श्रीमहंत शिवेंद्रपुरी हैं। यह अखाड़े में महामण्डलेश्वरों का पट्टा अभिषेक करते हैं। पर्व के दौरान साधु-संतों को अखाड़े में इन्हीं के आचार्यत्व में दीक्षा दी जाती है। दीक्षा में स्वयं का पिंडदान कर नागा संन्यासी बनाया जाता है। इस बार सिंहस्थ महापर्व में करीब दो से तीन मण्डलेश्वरों का आचार्य पीठाधीश्वर पट्टा अभिषेक कर महामण्डलेश्वर बनाएंगे।

शस्त्र और शास्त्र करते हैं निशान देवता की सुरक्षा
अखाड़े का पंच जिस पड़ाव स्थल पर ठहरता है उस जगह चार मढिय़ां अपने निशान देवता के आस-पास मढ़ी स्थापित कर बैठ जाते हैं। बीच में देवता का शाही कक्ष चारों ओर शस्त्र की सुरक्षा में रहता है। दूसरी ओर पंच के 52 सदस्य प्रतिदिन शास्त्रोक्त पूजन पाठ कर देवता की आराधना और सुरक्षा करते हैं।

तीन साल में होता है चुनाव

अखाड़े के रमता पंच में चार श्रीमहंत, चार कारोबारी, चार कोतवाल, चार अष्टकौशल महंत, 2 पुजारी, 2 कोठारी एवं 4 भंडारी होते हैं। इनका चुनाव हर तीन साल में होता है।

अखाड़े के चार संप्रदाय
आहवान अखाड़े के चार संप्रदाय है, जिसमें चार मुख्य गद्दी होती है। आनंदवार, भुरवार, भोगवार और पीरवार। आनंदवार संप्रदाय में में गिरि पर्वत और सागर होते हैं। भुरवार में पुरी, भारती और सरस्वती, वहीं भोगवार में वन, अरण्य और पीरवार संप्रदाय में तीर्थ और आश्रम होते हैं। इन सभी संप्रदाय के ईष्ट और प्रधान देव गणपति होते हैं।

ये हैं पदाधिकारी
पंच की 16 मढ़ी के श्रीमहंत कैलाशपुरी महाराज हैं। वर्तमान में अखाड़े के कोषाध्यक्ष भी हैं। मढ़ी के सचिव श्रीमहंत रघवीरपुरी महाराज हैं। थानापति महंत सेवकपुरी महाराज और अष्टकौशल महंत कर्नाटकपुरी महाराज हैं। रमता पंच की 4 मढ़ी के श्रीमहंत अवधेशानंद सरस्वती महाराज हैं। सचिव श्रीमहंत जयविजय भारती हैं। पंच की 13 मढ़ी के श्रीमहंत भोलागिरि महाराज हैं। इनके सचिव श्रीमहंत रामगिरि हैं और अष्टकौशल महत नरोत्तमगिरि हैं। 14 मढ़ी के श्रीमहंत पूनमगिरि महाराज हैं। वर्तमान में पड़ाव स्थल पर श्रीमहंत इंदरगिरि महाराज हैं और अष्टकौशल महंत निरंजनगिरि महाराज हैं।


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