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इस बावड़ी का है चमत्कारी पानी, नहाने से मिलता मातृत्व सुख

फर्नाजी मंदिर के समीप बने साडू माता की बावड़ी का पानी चमत्कारी माना जाता है। कहा जाता है कि बावड़ी के पानी से नहाने से मातृत्व सुख मिलता है।

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Lalit Saxena

Jul 16, 2016

bawdi of the miraculous water, motherhood pleasure

bawdi of the miraculous water, motherhood pleasure after bath

नागदा. शहर से 20 किमी दूर स्थित फर्नाजी मंदिर के समीप बने साडू माता की बावड़ी का पानी चमत्कारी पानी माना जाता है। कहा जाता है कि गुरु पूर्णिमा से चार दिन पूर्व ही इस बावड़ी में अमृत आ जाता है। इस वर्ष प्रशासन की अनदेखी के कारण माताओं को इस अमृत का लाभ नहीं मिल सकेगा। बावड़ी की सफाई न हो पाने के कारण इस वर्ष माताओं को परेशानी का सामना कर पड़ सकता है।

आदिवासी कुल देवी के रूप में पूजते है
मंदिर और बावड़ी को झाबुआ से आने वाले आदिवासी कुल देवी के रूप में पूजते है। सरपंच बद्रीलाल मलिहार के अनुसार बावड़ी के पानी से कपड़े गीले कर पहनने से जिन महिलाओं का दूध बनना और स्तन संबंधी विकार दूर होते है। वहीं स्थानीय महिलाएं मंदिर में नारियल चढ़ाकर बावड़ी से कपड़े भीगो कर ले जाती है। किदवंती यह भी है कि पूर्णिमा के चार दिन पहले से बावड़ी का पानी चमत्कारी हो जाता है। परेशानी यह है कि स्थानीय प्रशासन की अनदेखी के कारण बावड़ी की सफाई अब तक नहीं हो पाई है।

बावड़ी का उल्लेख गुर्जर पुराण में है
पं. जगदीश पंड्या के अनुसार के साडू माता बावड़ी का उल्लेख गुर्जर पुराण में है। जिसमें बताया गया है कि पृथ्वीराज चौहान द्वितीय के शासन काल में साडू माता का जन्म हुआ था। माता के कोई पुत्र नहीं थी। जिससे गांव वाले उन्हें हीन भावना से देखते थे। परेशान साडू माता ने एक ब्राह्मण का मार्गदर्शन लिया। जिसमें उन्हें पता चला कि गायों के देखभाल करने से उन्हें पुत्र प्राप्ति होगी। सालों सेवा करने के बाद भी माता को पुत्र की प्राप्ति नहीं हुई। परेशान होकर माता एक बावड़ी में जा बैठी। बावड़ी के समीप जाने से साडू माता को एक प्रकाश दिखाई दिया। माता ने थक हार कर बावड़ी के समीप करीब 20 साल तप किया। तप पूरा होने के बाद माता ने एक पुत्र को जन्म दिया।आषाढ़ मास की पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा कहते हैं।
पूर्णिमा वर्षा ऋतु के शुरुआत में आती है। यह मौसम न अधिक गर्म व न अधिक ठंडा रहता है। इसलिए गुरु पूर्णिमा के दिन को बावड़ी के लिए खास माना गया है। ग्रामीण साडू माता को महिलाओं की गुरु मानते है। इसलिए स्नान के लिए पूर्णिमा के दिन का चयन किया गया है। हालांकि बावड़ी देखने श्रद्धालुओं का आना जाना वर्षभर लगा रहता है।

लोगों की आस्था का केंद्र
मंदिर की मान्यता और प्राचीनता के बारे में जानकारी मिली है। यदि बावड़ी लोगों की आस्था का केंद्र है और खासकर महिलाओं की तो बावड़ी की सफाई जल्द करवाई जाएगी।
- अशोक व्यास, एसडीएम खाचरौद

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