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ड्रेस और किताबों पर अब नहीं चलेगी दबंगई, शिक्षा विभाग का सख्त एक्शन

आदेशानुसार निजी स्कूलों की ओर से की जानेवाली मनमानी को रोकने के लिए कमेटियां गठित की जाएगी। शिक्षा विभाग के अनुसार मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय अलग अलग कमेटियां गठित की जाएगी।

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मुरादाबाद में निजी स्कूलों की मनमानी चरम पर (Image - Freepik)


चूरू. पुस्तकों, यूनिफॉर्म, जूते और टाई आदि को लेकर निजी विद्यालयों की ओर से की जानेवाली मनमानी अब नहीं चलेगी। इस संदभ में एक बार फिर माध्यमिक शिक्षा निदेशक बीकानेर ने जिला शिक्षा अधिकारियों को दिशा निर्देश जारी किए हैं।निदेशक प्रारंभिक व माध्यमिक शिक्षा निदेशक (Director of Elementary and Secondary Education) सीताराम जाट की ओर से कहा गया है कि निजी विद्यालयों में पुस्तकों, यूनिफॉर्म, जूते और टाई के लिए मनमानी रोकने के संबंध में समय समय पर निर्देश दिए गए हैं। इसके बावजूद कतिपय गैर सरकारी स्कूलों में दिशा निर्देशों की पूर्णतया पालना नहीं की जा रही है।

पालना करें सुनिश्चित
शिक्षा निदेशक (Education Director) ने इसे गंभीरता से लेते हुए शिक्षा अधिकारियों से कहा है कि 1 अप्रेल से नया शैक्षिक सत्र शुरू हो चुका है। इसलिए एक बार फिर निर्देशित करते हुए कहा गया है कि गैर सरकारी स्कूलों में पुस्तकों, यूनिफॉर्म, जूते और टाई के लिए विद्यार्थियों को बाध्य किया जा रहा है तो इसकी शिक्षा विभाग निरीक्षण कर पता लगाए कि जिले में संचालित गैर सरकारी विद्यालयों में पुस्तकों, यूनिफॉर्म, जूते और टाई आदि से संदर्भित निर्देशों की संचालकों की ओर से पालना की जा रही है या नहीं।

गठित होगी कमेटियां
आदेशानुसार निजी स्कूलों की ओर से की जानेवाली मनमानी को रोकने के लिए कमेटियां गठित की जाएगी। शिक्षा विभाग के अनुसार मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय अलग अलग कमेटियां गठित की जाएगी। यह कमेटियां 15 अप्रेल से पहले जिले के सभी गैर सरकारी विद्यालयों का निरीक्षण करेंगी।

जिला शिक्षा अधिकारी को करेंगी रिपोर्ट
मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी की तीन सदस्यीय कमेटी की ओर से निजी विद्यालय में किए जानेवाले निरीक्षण के दौरान शिकायत पाए जाने, नियमों की अवहेलना की शिकायत मिलने पर संबंधित गैर सरकारी विद्यालयों से समेकित रिपोर्ट जिला शिक्षा अधिकारी को प्रस्तुत करेंगे।

अभिभावक असमंजस में
गैर सरकारी विद्यालयों में अपने बच्चों को पढ़ाने वाले अभिभावक भी अभी असमंजस में हैं। नया शिक्षा सत्र शुरू होने के साथ ही एक ओर निजी स्कूलों की ओर से पुस्तकें आदि बाजार से मंगवाने का क्रम चल रहा है दूसरी ओर अभिभावक तय नहीं कर पा रहे हैँ। अभिभावक अपने बच्चे के भविष्य को देखते हुए शिकायत भी नहीं कर रहे हैं लेकिन शिक्षा विभाग के निर्देशों की पालना के भी पक्ष में है। कुछ अभिभावकों को टटोलने का प्रयास करते है तो वे टालने का प्रयास करते हुए कहते हैं कि अभी देख रहे हैँ सोच रहे हैं।