
Ujjain Lok Sabha Seat 2024 : मध्य प्रदेश के मालवा क्षेत्र में स्थित उज्जैन-आलोट संसदीय सीट केंद्रीय राजनीति के हिसाब से काफी मायने रखती है। कभी कांग्रेस के कब्जे में रही यह सीट अब लंबे समय से भाजपा के गढ़ कहला रही है। भाजपा के गठन के बाद तो चुनाव में महज एक बार ही कांग्रेस इस पर कब्जा जमा पाई है। शुरुआत से अब तक के कुल 17 चुनावों के दौरान 12 बार इस सीट पर भाजपा या इससे पहले भी संबंधित विचारधारा के दल ही इस सीट से जीते हैं।
लोकसभा चुनाव में उज्जैन लोकसभा सीट को इस बार सबसे महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कांग्रेस की ओर से तेजतर्रार विधायक महेश परमार को यहां उम्मीदवारी सौंपी गई है, जबकि भाजपा से सांसद रहे अनिल फिरोजिया को ही पार्टी ने इस बार भी उम्मीदवार बनाया है। प्रदेश की सभी 29 लोकसभा सीटों में से उज्जैन-आलोट सीट को महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। इसका कारण ये है कि मालवा का बड़ा भाग इसमें शामिल होने के साथ ही इसका क्षेत्रफल भी काफी बड़ा है।
सीट के राजनीतिक इतिहास को देखें तो अधिकांश चुनाव में ये भाजपा के खाते में गई है। इसलिए इसे अब भाजपा के गढ़ के रूप में भी देखा जाता है। इस लोकसभा चुनाव में जहां भाजपा अपने गढ़ को स्थापित रखने की लड़ाई लड़ती नजर आई तो वहीं कांग्रेस इसे प्रतिद्वंद्वी से छीनकर मालवा के बड़े हिस्से में काबिज होने का जतन करती नजर आई। लोकसभा के चौथे और मध्य प्रदेश के आखिरी चरण में 13 मई को इस सीट पर मतदान हुआ है, जिसका परिणाम देश की सभी लोकसभा सीटों के साथ 4 जून को घोषित किया जाएगा।
उज्जैन आलोट लोकसभा सीट से भाजपा की ओर से डॉ. सत्यनारायण जटिया ने सर्वाधिक 9 चुनाव लड़े और 7 जीते हैं। इस सीट पर अब तक कुल 17 चुनाव हुए हैं। इनमें सर्वाधिक भाजपा के वरिष्ठ नेता डॉ. सत्यनारायण जटिया ने 9 बार चुनाव लड़ा। इनमें से वे 7 चुनाव जीते। आखिरी चुनाव उन्होंने तत्कालीन कांग्रेस प्रत्याशी प्रेमचंद गुड्डू से हारा था, जिसके बाद जटिया चुनाव नहीं लड़े। उज्जैन संसदीय क्षेत्र 8 विधानसभा क्षेत्रों से मिलकर बना है। इन विधानसभाओं में उज्जैन की 7 और रतलाम की 1 विधानसभा आलोट शामिल है। दरअसल, इस लोकसभा सीट के तहत आने वाली नागदा-खाचरौद घटिया, बड़नगर, उज्जैन उत्तर, उज्जैन दक्षिण, अलोट, सहित 8 विधानसभाओं में से 6 विधानसभा क्षेत्रों पर भाजपा विधायक हैं। जबकि महिदपुर और तराना पर कांग्रेस विधायक हैं। 1984 के बाद यहां भाजपा और कांग्रेस के बीच ही मुकाबला रहा है, लेकिन 1984 और 2009 को छोड़कर कांग्रेस यहां कभी भी नहीं जीत पाई। वहीं, यहां 1984 से अब तक 8 बार भाजपा के उम्मीदवार जीत हासिल कर चुके हैं।
2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के अनिल फिरोजिया ने उज्जैन से जीत दर्ज की। उन्हें 791663 वोट मिले, जो कुल वोट का 63.18% था। वहीं, कांग्रेस के बाबूलाल मालवीय दूसरे स्थान पर रहे। उन्हें 426026 वोट मिले और उनका वोट प्रतिशत 34% था। 2014 में उज्जैन लोकसभा सीट से भाजपा के प्रोफेसर चिंतामणि मालवीय ने जीत दर्ज की थी। उन्होंने 641101 वोट मिले, जो कुल वोट का 42.03 प्रतिशत था। वहीं, कांग्रेस के प्रेमचंद गुडडू दूसरे स्थान पर रहे उन्हें 331438 वोट मिले, जो कुल वोटों का 21.73% था। 2009 में उज्जैन लोकसभा सीट से कांग्रेस पार्टी के गुड्डू प्रेमचंद ने जीत दर्ज की। उन्हें 326905 वोट मिले, जो कुल वोटों का 26.08% था। वहीं, भाजपा के डॉ. सत्यनारायण जटिया को 311064 वोट मिले, जो कुल वोटों का 24.81% था। 2004 में भाजपा के डॉ. सत्यनारायण जटिया ने जीत दर्ज की उन्हें कुल 369744 मिले. वहीं, कांग्रेस के प्रेमचंद गुड्डू को 299341 मिले। 1999 में भाजपा के डॉ. सत्यनारायण जटिया ने उज्जैन लोकसभा सीट से जीत दर्ज की। उन्हें 360103 वोट मिले, जो कुल वोटों का 54.22% था। वहीं कांग्रेस के दूसरे स्थान पर रहे, उन्हें कुल 292065 वोट मिले, जो कुल वोटों का 43.98% था।
उज्जैन लोकसभा सीट पर कुल मतदाताओं की संख्या 14 लाख, 98 हजार, 473 है। यहां की जातिगत समीकरणों की बात करें, तो यहां सामान्य वर्ग के मतदाता 24.6 प्रतिशत हैं। वहीं, पिछड़े वर्ग के मतदाताओं की संख्या 18.6 प्रतिशत है। इसके अलावा, एससी-एसटी मतदाताओं की जनसंख्या 46.3 प्रतिशत हैं। यहां अल्पसंख्यक समाज के मतदाताओं की संख्या मात्र 3.9 प्रतिशत और अन्य 6.6 प्रतिशत हैं।
Updated on:
25 May 2024 03:43 pm
Published on:
25 May 2024 02:44 pm
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