
MP News: मध्यप्रदेश में इन दिनों जिला बनाने की मांग तेजी से उठ रही है। इसके लिए सरकार के द्वारा पुनर्गठन आयोग का गठन भी कर दिया गया है। जिसमें पुनर्गठन आयोग की जिम्मेदारी रिटायर्ड आईएएस मनोज श्रीवास्तव और मुकेश कुमार शुक्ला को दी गई है। पुनर्गठन आयोग की ओर से संभाग, जिले, तहसील, विकासखंड का नए सिरे से सीमांकन कर रूपरेखा तैयारी किए जाएंगे। इधर, उज्जैन से अलग होकर नागदा को जिला बनाने की मांग तेजी से उठ रही है।
नागदा को जिला बनाने के लिए तत्कालीन सीएम शिवराज सिंह चौहान भी ऐलान कर चुके है। उस समय नागदा को 4 तहसीलों और 422 गांवों मिलाकर जिला बनाने की घोषणा की गई थी। नागदा जिला, खाचरौद, आलोट और ताल तहसील को मिलाकर अस्तित्व में आएगा। इस जिले में 422 गांव शामिल और 200 ग्राम पंचायत होनी थी। हालांकि, शुरुआत में जरूर 4 तहसीलें रहेंगी लेकिन आगे चलकर इनमें उन्हेल को 5वीं तहसील बनाई जाएगी। इस तरह जिला 5 तहसीलों का जिला बनेगा।
नागदा को जिला बनाने की मांग साल 2008 से उठ रही है। कई बार घोषणा हुई मगर नागदा जिले के अस्तित्व में नहीं आ पाया। साल 2023 विधानसभा चुनाव के पहले नागदा को जिला बनाने की मांग को लेकर युवा कांग्रेस नेता बंसत मालपानी ने 250 किलोमीटर की भोपाल तक यात्रा निकाली थी। कमलनाथ सरकार में 18 मार्च 2020 को नागदा को जिला बनाने का प्रस्ताव पास हुआ था, लेकिन सरकार गिरने के बाद आगे कुछ नहीं हुआ। इसके बाद तत्कालीन सीएम शिवराज सिंह चौहान ने जिला बनाने की घोषणा दो बार की। इधर, विधायक तेज बहादुर चौहान का कहना है कि प्रदेश में भौगोलिक सीमाओं का नए सिरे से परिसीमन किया जा रहा है। इस वजह से इस मांग पर अमल होना अभी असंभव है।
दरअसल, उज्जैन मुख्यालय की नागदा से दूरी 57 किलोमीटर है। वहीं, खाचरोद से 74 किलोमीटर के करीब है। जिस वजह से लोगों को काम कराने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। अगर खाचरौद, आलोट और ताल को तहसील और नागदा को जिला बनाया जाता है, तो जिला मुख्यालय की दूरी कम हो जाएगी।
बता दें कि, मध्यप्रदेश में कुल 10 संभाग हैं। जिसमें 56 जिले और 430 तहसीलें हैं। नए सिरे से परिसीमन के बाद संभाग, जिले और तहसील का नक्शा बदल जाएगा। साथ ही परिसीमन में पुर्नगठन आयोग देखेगा कि कहां कितनी विसंगतियां हैं।
Updated on:
15 Dec 2024 04:19 pm
Published on:
15 Dec 2024 04:14 pm
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