
445 फीट के सूखे बोरवेल में डाला था एक लाख का सामान, वह भी फंसा, किसान परेशान
सलसलाई. समीपस्थ ग्राम मदाना गांव के कृषक लक्ष्मण बामनिया के खेत पर लगी ट्यूबवेल बोर से तीसरे दिन गुरुवार को भी तेज गति से फव्वारा निकल रहा था। दरअसल किसान ने पिछले वर्ष यह बोर कराया था, जो कि ४४५ फीट पर बंद हो गया था और उसमें पानी नहीं निकला था। उस समय किसान ने मोटर व पाइप नहीं लगाया था, लेकिन इस साल फिर किसान 1 लाख का सामान लेकर उस बोर में उतारा था। इसके बाद १७ दिसंबर को अचानक बोर से बड़ी मात्रा में आवाज आने लगी जैसे कोई ट्रेन चल रही हो। साथ ही इस 8 इंची चौड़े बोर से करीब ४० फीट ऊंचाई तक फव्वारा निकलने लगा, जिसका प्रेशर काफी तेज था, जिसे देखकर हर कोई दंग रह गया। पूरे गांव और आसपास के क्षेत्र में यह बात चर्चा का विषय बनी रही। सभी के लिए यह कौतूहल का विषय बना रहा।
किसान बोला-कहीं कर्जवान न हो जाऊं
कृषक लक्ष्मण बामनिया ने बताया कि हमें तो यह घटना समझ नहीं आई, क्योंकि पहले कभी गांव सहित आसपास के गांव में ऐसा कोई माला देखने को नहीं मिला। कभी हम अपने किस्मत पर रोते हैं क्योंकि उक्त बोर में से अचानक बगैर बिज़ली के इतना तेज गति से पानी निकला आश्चर्य की बात है। उक्त बोर में मैंने 1 लाख रुपए का नया सामान लाकर डाला है। अगर बोर से इस तरह पानी आना बंद नहीं हुआ तो मैं बेवजह से कर्जवान हो जाऊंगा। खास बात तो यह है कि
बोर से फव्वारे के साथ तेज गति से पत्थर भी निकल रहे हैं जिसके चलते बोर में डाली गई मोटर भी पूरी तरह से जाम हो चुकी है। इस मामले को 3 दिन बीत चुके हैं और तीसरे दिन भी वही घटना जारी है। उक्त बोर में से आवाज आ रही हैं और कब बोर से पानी के फव्वारे शुरू हो जाए भगवान ही जाने। हालांकि शुक्रवार को पानी का प्रेशर कम था।
एक्सपर्ट व्यू : भूगर्भीय हलचल के कारण हो रहा
&इस साल अधिक बारिश हुई। साथ ही उक्त बोर का कनेक्शन किसी तालाब या नदी से भी जुड़ गया हो सकता है। इसके अलावा जमीन के नीचे बोर में जमा हुई हवा अब अपनी जगह छोड़कर बाहर निकल रही है। इसीलिए पानी और पत्थर भी फव्वारे के साथ प्रेशर के साथ बाहर आ रहे हैं। दरअसल यह एक भूगर्भीय हलचल है। जमीन के नीचे का लावा अपना काम कर रहा है। ऐसा मोटर डाले होने के बावजूद हो रहा है, क्योंकि बोर में इतने दिनों तक हवा भर गई थी जो अब निकल रही है। यह स्थिति सामान्य हो जाएगी तो तब पानी निकला स्वत: ही बंद हो जाएगा।
- डॉ. केएन सिंह, भूगर्भ विज्ञान, अध्ययनशाला विभागाध्यक्ष, विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन
Published on:
20 Dec 2019 12:00 am

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