script व्यक्तित्व को निखारने और अभिमान के साथ टीम वर्क करने का दिया प्रशिक्षण | Gave training to enhance personality and do teamwork with pride | Patrika News

व्यक्तित्व को निखारने और अभिमान के साथ टीम वर्क करने का दिया प्रशिक्षण

locationउमरियाPublished: Jan 16, 2024 04:09:21 pm

Submitted by:

ayazuddin siddiqui

मेरी बीट मेरा अभिमान के तहत वन रक्षकों ने साझा किए अनुभव

Gave training to enhance personality and do teamwork with pride
Gave training to enhance personality and do teamwork with pride

मेरी बीट मेरा अभिमान बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व प्रबंधन ने लास्ट विल्डरनेस फाउंडेशन की मदद से वन रक्षकों के लिए अपने अनुभव साझा करने, अपने व्यक्तित्व को निखारने, उच्च मनोबल एवं अभिमान के साथ कार्य करने के लिए एक पहल की है। इसका उद्देश्य वनरक्षकों में अपने कार्य के प्रति रुचि पैदा करना, मनोबल को बढ़ाना, अपने कार्य पर गर्व करना है। कार्यशाला में द नेचरलिस्ट स्कूल से आई प्रिया वेंकटेश एवं लास्ट विल्डरनेस फाउंडेशन के सदस्य विद्या वेंकटेश, गौरव शिरोडकर ने बड़े ही आसान व रोचक तरीकों से खेल खेल में वनरक्षकों को प्रशिक्षण दिया।

मेरी बीट मेरा अभिमान नामक इस पहल की कार्यशाला का शुभारंभ बांधवगढ़ टाइगर रिज़र्व के क्षेत्र संचालक एलएल उड़के एवं उप संचालक, प्रकाश कुमार वर्मा ने किया। 8 जनवरी से 13 जनवरी तक चली इस कार्यशाला में तीन-तीन दिवसों के लिए 2 बैच में बांधवगढ़ टाइगर रिज़र्व की सभी 9 रेंज से कुल 36 वन रक्षकों को प्रशिक्षण दिया गया। कार्यशाला का उद्देश्य जमीनी स्टाफ में व्यवहार परिवर्तन, टीम वर्क, कौशल विकास उन्नयन आदि था।

वनरक्षक अपनी रुचि अनुसार कार्य कर अपनी बीट पर अभिमान करें

कार्यशाला के अंतिम दिवस बांधवगढ़ टाइगर रिज़र्व के उप संचालक प्रकाश कुमार वर्मा भी शामिल हुए, उन्होंने सभी प्रतिभागियों से चर्चा की एवं चर्चा के दौरान वन रक्षको पर कार्यशाला का प्रभाव भी महसूस किया। इन्होंने इस बात पर भी बल दिया कि प्रत्येक वनरक्षक की बीट में कुछ न कुछ अभिमान करने के लिए होता है। सभी वनरक्षक अपनी रुचि अनुसार अच्छा कार्य कर अपनी बीट पर अभिमान करें जिससे पूरे बांधवगढ़ प्रबंधन को उन पर अभिमान हो सके। कार्यशाला के समापन पर प्रतिभागिगों ने भी अपने अनुभव साझा किए। मोहित खटीक, वनरक्षक बताते हैं कि अधिकतर कार्यशाला के सिर्फ एक श्रोता की तरह बैठ कर सुना जाता है परंतु इस कार्यशाला में हम सभी लोग खुद शामिल हो कर कार्य कर रहे थे। जिससे कि हमारे अंदर छुपी प्रतिभाओं को भी प्रदर्शित करने का मौका मिला। स्मृति उपाध्याय वनरक्षक बताती है कि जंगल की इतनी कठिन नौकरी में हम काफी व्यस्त हो जाते हैं जब हमने इतने खेल खेले तब हमें हमारा बचपन याद आ गया। प्रतियोगिताओं के माध्यम से सिखाए गए गुर हमें हमेशा याद रहेंगे।

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