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कर्तव्य और जिम्मेदारियों का एहसास दिलाने के साथ हमारा हक दिलाते हैं संविधान के मौलिक अधिकार

संविधान के 74 वर्ष अपेक्षाएं एवं उपलब्धियां विषय पर संगोष्ठी का आयोजन

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The fundamental rights of the Constitution provide us with a sense of our duties and responsibilities

The fundamental rights of the Constitution provide us with a sense of our duties and responsibilities

संविधान दिवस के अवसर पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा जिला एवं सत्र न्यायाधीश के मार्गदर्शन में भारतीय संविधान की प्रस्तावना का वाचन एवं संविधान के 74 वर्ष अपेक्षाएं एवं उपलब्धियां विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। एडीआर सेंटर के सभागार में आयोजित संविधान दिवस कार्यक्रम में सर्वप्रथम न्यायाधीशगण, अधिवक्ता एवं कर्मचारियों की उपस्थिति में प्रधान न्यायाधीश कुटुम्ब न्यायालय अवधेश कुमार गुप्ता ने भारतीय संविधान की प्रस्तावना का वाचन कराया।

उन्होंने बताया कि संविधान ही है जो अलग-अलग धर्मों व जातियों की भारत की 140 करोड़ की आबादी को एकजुट करके रखता है। संविधान में दिए गए मौलिक अधिकार हमारी ढाल बनकर हमें हमारा हक दिलाते हैंं। इसमें जुड़े मौलिक कर्तव्य हमें अपनी जिम्मेदारियों का एहसास कराते हैं। प्रधान न्यायाधीश कुटुम्ब न्यायालय ने बताया कि भारतीय संविधान के बारे में नागरिकों को संवैधानिक मूल्यों का प्रचार करने के उद्देश्य से संविधान दिवस मनाया जाता है। सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण संगीता पटेल ने भारतीय संविधान के मौलिक कर्तव्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि नागरिक अपने कर्तव्य का पालन करें तो उन्हें अपने अधिकारों के लिए संघर्ष नहीं करना पड़ेगा।

कार्यक्रम में प्रथम अपर जिला न्यायाधीश आरएस कनौजिया, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट आरपी अहिरवार, द्वितीय व्यवहार न्यायाधीश वरिष्ठ खण्ड धर्मेन्द्र खण्डायत, न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी खालिदा तनवीर, न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी अमृता मिश्रा, न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी दिव्या विश्वकर्मा, न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी अपूर्व मेहरोत्रा, जिला अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष पुष्पराज सिंह, एलएडीसीएस के समस्त अधिकारीगण, जिला न्यायालय उमरिया के कर्मचारीगण, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के समस्त कर्मचारी एवं अधिवक्तागण सम्मिलित रहे।

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