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विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी से मरीजों को नहीं मिल रहा समुचित उपचार

नेत्र रोग, ईएनटी और रेडियोलॉजिस्ट के पद काफी समय से खाली, सीएमएचओ ने स्वीकारी कमी, रेफरल सेंटर बना जिला चिकित्सालय
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उमरिया

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Ayazuddin Siddiqui

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Updated: 14 Jan 2026, 4:15 PM IST

नेत्र रोग, ईएनटी और रेडियोलॉजिस्ट के पद काफी समय से खाली, सीएमएचओ ने स्वीकारी कमी, रेफरल सेंटर बना जिला चिकित्सालय

नेत्र रोग, ईएनटी और रेडियोलॉजिस्ट के पद काफी समय से खाली, सीएमएचओ ने स्वीकारी कमी, रेफरल सेंटर बना जिला चिकित्सालय

जिला अस्पताल विशेषज्ञ चिकित्सक न होने के कारण मरीजों को समुचित इलाज नहीं मिल पा रहा है। जिला अस्पताल में आंख के डॉक्टर पिछले 4 साल से नहीं हैं। ईएनटी विशेषज्ञ की गैरमौजूदगी को 8 साल हो चुके हैं। रेडियोलॉजिस्ट 2 साल से पदस्थ नहीं है। सामान्य जांच और इलाज के लिए भी मरीजों को जबलपुर, शहडोल या कटनी रेफर किया जा रहा है।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. वीएस चंदेल ने स्वीकार किया कि डॉक्टरों की कमी की जानकारी प्रदेश के उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला को दी जा चुकी है। उनके अनुसार यह विषय सरकार के संज्ञान में है। इसके बावजूद जमीनी स्तर पर अब तक कोई ठोस सुधार नजर नहीं आ रहा। इस मुद्दे पर कांग्रेस जिला अध्यक्ष इंजीनियर विजय कोल ने ने कहा कि जिला अस्पताल इलाज का केंद्र बनने के बजाय रेफरल सेंटर बन चुका है।


कांग्रेस ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द डॉक्टरों की नियुक्ति नहीं हुई तो पार्टी पूरे जिले में आंदोलन चलाएगी। भाजपा जिला अध्यक्ष आशुतोष अग्रवाल ने कहा कि डॉक्टरों की कमी सिर्फ उमरिया की समस्या नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश में यही हाल है। उन्होंने दावा किया कि सरकार ने कई मेडिकल कॉलेज शुरू किए हैं और आने वाले एक साल में लगभग पांच हजार नए डॉक्टर उपलब्ध होंगे।


गरीब मरीज सबसे ज्यादा प्रभावित


डॉक्टरों की कमी का सबसे ज्यादा असर गरीब और ग्रामीण मरीजों पर पड़ रहा है। बाहर इलाज कराने में भारी खर्च आता है, जो कई परिवारों के लिए संभव नहीं। ऐसे में जिला अस्पताल से ही बेहतर इलाज की उम्मीद रखने वाली जनता खुद को ठगा हुआ महसूस कर रही है।