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अपने कर्तव्यों को याद रखकर समाज को आगे बढ़ाना चाहिए, आदर्श समाज है देश की शोभा

प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस में एक दिवसीय प्रशिक्षण शिविर संपन्न

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प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस में एक दिवसीय प्रशिक्षण शिविर संपन्न

प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस में एक दिवसीय प्रशिक्षण शिविर संपन्न

यूनिसेफ के सहयोग से संचालित कार्यक्रम के अंतर्गत स्वयंसेवकों के एकदिवसीय प्रशिक्षण के लिए प्राचार्य डॉ. विमला देवी मरावी एवं कार्यक्रम अधिकारी डॉ. अरविंद शाह बरकड़े की उपस्थिति में एनएसएस अधिनायक शिवांश सिंह सेंगर, सचिव विनोद कुमार सेन और स्वयंसेवक ओम तिवारी के सहयोग से एक दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया।


कार्यक्रम में ट्रेनर की भूमिका विजय सिंह बघेल ने स्वयंसेवकों को प्रशिक्षित किया। बताया कि प्रति वर्ष, प्रति माह, प्रति 2 दिन में मध्य प्रदेश और देश भर से लगभग कितने बच्चे चाइल्ड ट्रैफिकिंग का शिकार होते हैं और इस समस्या का समाधान करने में युवा पीढ़ी किस प्रकार से सहयोग कर सकती है। कार्यक्रम में सेवानिवृत्त प्राध्यापक डॉ एसएन स्वामी ने कहा कि गुड टच और बैड टच के संदर्भ में युवाओं अपनी जिम्मेदारियों को समझना होगा। वरिष्ठ प्राध्यापक संजीव शर्मा ने कहा कि सरकार प्रत्येक घर पर नजर नहीं रख सकती। ऐसे में हमारी जिम्मेदारी है कि अपने गली मोहल्ले, शहर के किसी परिवार की क्षति होने से रोकने में अपना योगदान दें। ऋषिराज पुरवार ने कहा कि हमें अपने उद्देश्यों को नहीं भूलना चाहिए किसी भी देश की शोभा उसके आदर्श समाज से होती है इसीलिए कभी भी अपने समाज के प्रति अपने कर्तव्यों को नहीं भूलना चाहिए।


कार्यशाला में डॉ. रमेश प्रसाद कोल, तुलसी रानी पटेल एवं डॉ. देवेश कुमार अहिरवार, राजेन्द्र प्रसाद पटेल ने भी विद्यार्थियों को संबोधित किया। कार्यक्रम के मध्य सभी स्वयं सेवकों का प्री एवं पोस्ट टेस्ट लिया गया, जिसके माध्यम से चौम्पियन फॉर चाइल्ड प्रोटेक्श्न प्रोग्राम की मंशा को बेहतर तरीके से उनके मध्य प्रस्तुत किया गया। कुछ फिल्में भी विद्यार्थियों के मध्य दिखाई गई एवं उनके लक्ष्यों से विद्यार्थियों को अवगत कराया गया। अंत में प्राचार्य एवं स्टॉफ द्वारा विद्यार्थियों को प्रमाण-पत्र भी वितरित किए गए। साथ ही स्वरयं सेवकों को प्रेरित किया गया कि न सिर्फ अपने व्यक्तित्व का विकास करना वरन् समाज में प्रत्येक व्यक्ति तक पहुंचकर उन्हें इस प्रकार जागरूक किया जाए कि वे आसानी से लक्ष्यों की पूर्ति में सक्षम हो सके।

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