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काशी के बेटों का रक्त भी न बचा सका भदोही के लाल को

बीएचयू के ट्रामा सेंटर में भर्ती था श्रेयांश

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Vikas Verma

Jul 25, 2016

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वाराणसी. नियति का खेल ही कहेंगे कि सुबह-सबेरे मां ने अपने बच्चों को उठाकर लाड-प्यार के साथ स्कूल जाने के लिए तैयार किया। किसी के पिता तो किसी की मां अपने बच्चे को लेकर बस तक छोडऩे आई थीं। बस में चढ़ते समय बच्चों ने अपने माता-पिता को बॉय-बॉय भी कहा लेकिन उन अभागे माता-पिता को क्या मालूम कि उनका बच्चा जिंदगी के आखिरी सफर पर निकला है।

बनारस के पड़ोसी जिले कालीन नगरी भदोही में सोमवार को मानव रहित रेलवे क्रासिंग पर हुए हादसे के बाद जिंदगी के लिए लड़ रहे कुछ मासूमों को बीएचयू के ट्रामा सेंटर लाया गया था। उन्हीं बच्चों में एक था श्रेयांश। भदोही में स्कूली बस और ट्रेन के बीच टक्कर के बाद घायलों को वाराणसी लाने की सूचना पर महापौर रामगोपाल मोहलेए एमएलसी केदारनाथ सिंह, एमएलसी लक्ष्मण आचार्य, महानगर अध्यक्ष प्रदीप अग्रहरि, सौरभ श्रीवास्तव समेत कई भाजपा नेता व अन्य राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि बीएचयू ट्रामा सेंटर पहुंचे।

बुरी तरह जख्मी श्रेयांश को रक्त की आवश्यकता थी लेकिन परिजनों के पास कोई डोनर नहीं था जिसके बदले वह रक्त ले सकें। परिजन परेशान होकर लोगों से गुहार लगा रहे थे किसी तरह उनके बेटे की जिंदगी बचा लें। समझ नहीं आ रहा था कि आखिर कैसे बेटे के लिए रक्त का इंतजाम करें।

महापौर के साथ घायलों को देखने पहुंचे पार्षद सत्यप्रकाश कौशिक उर्फ सत्यम सिंह, भाजपा महानगर मधुकर चित्रांश व पार्षद अजय गुप्ता आगे आए और उन्होंने श्रेयांश के लिए रक्तदान किया। डाक्टरों ने तेजी दिखाई और श्रेयांश को रक्त चढ़ाया लेकिन उसकी किडनी ने जवाब दे दिया था। कोशिशों के बाद भी श्रेयांश की जान न बच सकी।