मौसम ने ली करवट, दिल्ली ही नहीं अब वाराणसी की हवा भी हुई जहरीली

-विश्व स्वास्थ्य संगठन की चेतावनी के बाद भी नहीं सुधर रहा प्रशासन
-चारों तरफ चल रहे निर्माण कार्यों से पूरे शहर गर्द के गुबार में
-मानकों की पूरी तरह से हो रही अनदेखी
-दिल्ली से कमतर नहीं है वाराणसी की दुर्दशा

डॉ अजय कृष्ण चतुर्वेदी

वाराणसी. मौसम बदलते ही त्योहारों की तरह हर साल दीपावली से पहले दिल्ली एनसीआर की आबो हवा को लेकर हाय तौबा मचने लगता है। तमाम उपाय भी दिल्ली सरकार की ओर से किए जाते हैं पर प्रधानमंत्री का संसदीय क्षेत्र, देश की सांस्कृतिक राजधानी भी वायु प्रदूषण के मामले में दिल्ली से कमतर नहीं है। यहां तक कि विश्व स्वास्थ्य संगठन चेतावनी भी जारी कर चुका है। पिछले साल ही विश्व स्वास्थ्य संगठन ने दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों की सूची जारी की थी जिसमें 15 में से 14 शहर भारत के थे और इसमें बनारस तीसरे नंबर पर रहा। बावजूद इसके वाराणसी प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने भी इस पर कोई ध्यान नहीं दिया।

डब्ल्यूएचओ की शीर्ष 15 प्रदूषित देशों की सूची में कानपुर सबसे ऊपर था। इसके बाद फरीदाबाद, वाराणसी, गया, पटना, दिल्ली, लखनऊ, आगरा, मुजफ्फरपुर, श्रीनगर, गुरुग्राम, जयपुर पटियाला और जोधपुर शामिल थे।

वाराणसी और पूर्वांचल के वायु प्रदूषण पर एक दशक से भी ज्यादा समय से काम कर रहीं क्लाइमेंट एजेंडा की मुख्य कार्यकर्ती एकता शेखर कहती हैं विश्व स्वास्थ्य संगठन की चेतावनी और केयर 4 एयर व क्लाइमेट एजेंडा के प्रयासों के बाद बनारस में 15-20 स्थान पर एयर क्वालिटी को दर्शाने वाले डिस्प्ले बोर्ड लगे लेकिन इसमें से केवल मलदहिया चौराहे का डिस्प्ले बोर्ड ही काम कर रहा है। लेकिन उस पर भी चार महीने से एयर क्वालिटी का आंकड़ा नहीं बदला गया है। वहां लगातार 324 ही दिखा रहा है। ये है जिला प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की संवेदनशीलता।

उऩ्होंने पत्रिका से खास बातचीत में बताया कि आलम यह है कि 19 अक्टूबर को pm 2.5-290 और pm10-254 तक पहुंच गया है। इसे बेहद खराब एयर इंडेक्स माना जाता है। बावजूद इसके प्रशासन की ओर से न तो अभी तक कोई एडवाइजरी जारी की गई है न ही वायु प्रदूषण रोकने की कोई पहल ही ही रही है। उन्होने कहा कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड भी दीपावली के बाद एक आंकड़ा प्रदर्शित कर अपनी जिम्मेदारी से मुक्त हो जाएगा कि इस वर्ष दीपावली पर वायु प्रदूषण इतना रहा। दीपावली के दिन क्या हाल होगा कितने लोग घरों को चारों तरफ से बंद कर कब तक इस इंतजार में पड़े रहेंगे कि कब ये काले धुएं छटेंगे और वो खुली हवा में सांस ले पाएंगे।

उन्होंने कहा कि दीपावली के पहले प्रशासन आतिशबाजी के लिए स्थान चिह्नित कर देगा। पटाखा बेचने वाले भी पैकिंग पर इको फ्रेंडली पटाखा होने का लेबल चस्पा कर देंगे जिन पर प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड भी आंख मूंद कर विश्वास कर लेगा। कोई यह जहमत उठाने की कोशिश नहीं करेगा कि क्या ये पटाखे वास्तव में इको फ्रेंडली हैं। एकता शेखर और उनकी सहयोगी शानिया अनवर ने लोगों से ये अपील की कि दीवाली पर दीपक जलाएं, घरों को रोशन करें, मिठाइयां खाएं और खिलाएं पर पटाखे न छोड़ें क्योंकि कोई भी चीज जब जलेगी तो धुआं होगा जो वायु को प्रदूषित ही करेगा।

डब्ल्यूएचओ की रेड लिस्ट

कानपुर : 173
फरीदाबाद : 151
वाराणसी : 151
गया : 149
पटना : 144
दिल्ली : 143
लखनऊ : 138
आगरा : 131
मुजफ्फरपुर : 120
श्रीनगर : 113
गुरुग्राम : 113
(डब्ल्यूएचओ की 2018 की सूची)


सीपीसीबी व अन्य के मुताबिक शहरों में प्रदूषण का हाल
दिल्ली : 325
नोएडा : 325
आगरा : 144
गाजियाबाद : 378
कानपुर : 430
फरीदाबाद : 309
वाराणसी : 329
पटना : 318
लखनऊ : 353
मुजफ्फरपुर : 318
गुरुग्राम : 324
गया : 300
जयपुर : 152
(ये आंकड़े गुरुवार शाम चार बजे के पहले अधिकतम पीएम 2.5 के हैं)

Ajay Chaturvedi
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