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#SpeakUp-नहीं मिली सरकारी इमदाद, चंदे के सहारे यह बेटी बन गई स्ट्रांग वूमेन ऑफ एशिया

कॉमनवेल्थ गेम में पांच गोल्ड मेडल, और कई पदक जीतने वाली इस महिला ने लिफ्टिंग के लिए लिया था पत्थरों का सहारा, से लड़ी जंग और बन गई एशिया की स्ट्रांग वूमेन, नक्सल प्रभावित क्षेत्र चुनार की रहने वाली हैं निधि सिंह पटेल, उत्तर प्रदेश सरकार से  नहीं मिली कोई मदद...

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Jyoti Mini

Aug 26, 2016

nidhi singh

nidhi singh

वाराणसी. जिस युवा खिलाड़ी ने मस्कट में भारत का लोहा मनवाया, उसकी कहानी काफी संघर्ष भरी है। गरीबी में पली बढ़ी वाराणसी के समीपवर्ती जिले मिर्जापुर की रहने वाली निधि सिंह पटेल को हर मोर्चे पर लड़ाई लडऩी पड़ी। इस लड़ाई में उसे साथ मिला तो कुछ अपनों का जिन्होंने उसका हौंसला नहीं टूटने दिया और आज वह इस मुकाम पर है कि देश उसपर गर्व कर सके। वह अब स्ट्रांग वूमेन ऑफ एशिया हो चुकी है। उसने मसकट में चल रही एशियन बेंच पेस पावर लिफ्टिंग प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल हासिल किया। साथ ही स्ट्रांग वूमेन ऑफ एशिया का खिलाब अपने नाम किया।


दरअसल, मिर्जापुर जिले के नक्सल प्रभावित क्षेत्र चुनार के पचेवरा गांव की रहने वाली अंतरराष्ट्रीय पावर लिफ्टर निधि सिंह पटेल के पिता गिरिजा प्रसाद पटेल चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी पद से रिटायर हुए। चार भाई-बहन होने के कारण गरीबी ने कभी साथ नहीं छोड़ा। ऐसी स्थिति में निधि के पास हमेशा संसाधनों का अभाव रहा।

नहीं हारी हिम्मत
निधि के स्थानीय कोच केपी त्रिपाठी बताते हैं कि उसने कभी हिम्मत नहीं हारी। गांव की पगडंडियों से होते हुए यह लड़की कई देशों में भारत का झंडा बुलंद करती रही। उसने अबतक कई चैंपियनशिप में भारत का नाम रोशन किया।

स्थानीय अधिकारियों ने जुटाया चंदा
मसकट जाने के लिए निधि के पास पैसे नहीं थे। ऐसे में कुछ स्थानीय अधिकारियों ने चंदा जुटाकर उसे भेजा। वहां उसने सभी की उम्मीदों पर खरा उतरते हुए स्वर्ण पदक जीता। इसके पहले जुलाई में हांगकांग में हुई एशिया पावर लिफ्टिंग प्रतियोगिता में भी उसने भारता का प्रतिनिधित्व करते हुए कांस्य पदक जीता था।

नहीं मिली शासन की मदद
निधि को हर मोर्चे पर खुद लड़ाई लडऩी पड़ी। उसने मसकट जाने के लिए शासन से मदद की गुहार लगाई, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। देश का नाम कई बार रोशन कर चुकी इस प्रतिभावान खिलाड़ी की सुध शासन ने नहीं कभी नहीं ली।

पावर लिफ्टिंग के लिए पत्थर थे सहारा
पोस्टग्रेजुएट निधि ने हमेशा ही संघर्ष किया, जब उसे खेल संसाधनों की जरूरत थी तो उसके पास पत्थरों के सिवा कुछ नहीं था। ऐसे में उसने इसी का सहारा लिया। इन्हीं को अपना संसाधन बनाया और अंतरराष्ट्रीय वेट लिफ्टर तक का सफर तय किया।


निधि की उपलब्धियां

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2010 में मनीला में एशियन बेंच प्रेस चैम्पियनशिप में रजत पदक
-2011 में ताइवान में एशिया पावर लिफ्टिंग में कांस्य पदक
-2012 में लंदन में कॉमनवेल्थ गेम में पांच गोल्ड मेडल

संबंधित खबरें

-2015 में हांगकांग में एशिया पावर लिफ्टिंग में कांस्य पदक


इस मुद्दे पर जब पत्रिका संवादगाता ने निधि पटेल से बात की तो नीधि ने बताया कि यूपी में स्टेडियम और कोच की कमी है सरकार खेल पर ध्यान नहीं देती डाइट भी खराब है 4 हजार रुपये डाइट के लिए मिलता है पर वह खिलाडीयों तक नहीं पहुंचता सरकारी धन रास्ते में ही लोग खा जाते हैं। यूपी में अगर कुश्ती ,जिम्नास्टिक , किसी भी खेल की तैयारी करनी हो तो यहां कोच नहीं मिलते । हालत का अंदाज इसी से लगाइए की मिर्ज़ापुर में स्टेडियम बन रहा है पर अभी तक नहीं बना है हमें भी कोई मदत नहीं मिली दोस्तों और लोगो की मदत से मैंने अन्तराष्ट्रीय मैच खेला ।

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