परकोटा स्थित प्राचीन महाराजा पुस्तकालय में 200 साल पुरानी भृगु संंहिता फिर से पुनर्जीवित हो उठी है। भविष्य पुराण और अबुल-फजल का उूर्द में लिखा महाभारत भी अपने स्वरूप में लौट आया है। दरसअल, पुस्तकालय में 108 हस्त लिखित सहित 350 दुर्लभ ग्रंथों को फिर से संवारने का काम पूरा कर लिया गया है। डेढ़ सौ साल पुराने पुस्तकालय की पहचान बनी पांडुलिपियों और ग्रंथों के अक्षर मिट गए थे, हतना ही नहीं, पन्ने पुराने हो गए थे। आधुनिक तकनीक से इन्हें संरक्षित किया गया है। अब पुस्तक प्रेमियों को फिर से इन्हें पढ़ने का मौका मिलेगा। करीब ढाई साल बाद जून में पुस्तकालय को शुरू कर दिया जाएगा।