हर साल की तरह एक बार फिर इंटरनेशनल म्यूजियम डे मनाया जा रहा है। राजधानी जयपुर में भी म्यूजियम डे के अवसर पर प्रदेश भर के संग्रहालयों और स्मारकों पर पर्यटकों का प्रवेश निशुल्क होगा। उनका राजस्थानी परम्परा के मुताबिक स्वागत होगा। लेकिन अब जयपुर आने वाले पर्यटक केवल अल्बर्ट हॉल देखकर ही संतुष्ट नहींहोते कुछ नया देखने की चाह उन्हें दूसरे म्यूजियम की ओर ले जा रही है। अल्बर्ट हॉल म्यूजियम में उन्हें सवा दौ साल पुरानी 20 हजार से अधिक पुरासामग्री के साथ ही तकरीबन 2300 साल पुरानी ममी और उसका एक्सरे सहित कई अन्य पुरामहत्व की वस्तुएं देखने को मिलती है तो ऐसे कई अन्य म्यूजियम भी हैं जो अपने आप में अनूठे हैं। जिन्हें देखने के लिए पर्यटक उनकी ओर भी रुख कर रहे हैं। कहा जा सकता है कि राजधानी जयपुर में अब म्यूजियम कल्चर विकसित हो रहा है।
2300 साल पुरानी ममी को लेकर क्रेजी पर्यटक
अल्बर्ट हॉल देश के उन स्थानों में से एक है जहां मिस्र की ममी को देखने के लिए पर्यटक क्रेजी रहते हैं। म्यूजियम के अधीक्षक राकेश छोलक के मुताबिक मिस्र के पैनोपोलिस प्रदेश के अखमीन की तूतू नामक महिला की ममी को यहां संरक्षित कर रखा गया है। इस ममी को 1883 में भारत लाया गया था। यहां दुनिया की दूसरी सबसे प्राचीन चारबाग शैली की करीब 400 साल पुरानी कालीन भी पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करती है। कालीन की बुनाई ईरानी बगीचे के आधार पर की गई थी। कालीन की लंबाई 28 फीट 4 इंच है तो चौड़ाई 12फीट 4 इंच है। म्यूजियम में चौथी से 12वीं के साथ 19वीं शताब्दी की पाषाण प्रतिमाएं मौजूद हैं। नवग्रह पट्ट, गणेशजी, दशावतार और शिव परिवार, महिषासुर मर्दनी, वैष्णव और शिव परिवार भी यहां देखने को मिलता है। अल्बर्ट हॉल आने वाले पर्यटकों की संख्या में भी लगातार इजाफा हो रहा है। गत वर्ष इसे देखने के लिए तकरीबन साढ़े नौ लाख पर्यटक पहुंचे थे।
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अन्य म्यूजियम भी कम नहीं
जयपुर में कई और ऐसे म्यूजियम भी हैं जो अपने आप में अनूठे हैं। जिनके प्रति पर्यटकों का आकर्षण बढ़ा है। इन म्यूजियम में डिस्प्ले किए गए आइटम्स को देखने के लिए पर्यटक इनकी ओर रुख कर रहे हैं।
खजाना महल में दुनिया की सबसे बड़ी अंगूठी
जलमहल के सामने कुछ ही समय पूर्व ट्रायल बेस पर शुरू किया गया बेशकीमती जेम स्टोन व गहनों पर आधारित प्रदेश का पहला म्यूजियम खजाना महल है। यहां दुनिया की सबसे बड़ी अंगूठी है, जिसका डायमीटर 4 फीट का है, 111 किलो की इस अंगूठी पर जयपुरी लाख का काम किया गया है और 55 मिमी का रूबी का स्टोन लगाया गया है। साथ ही 8 मिमी के सिंथेटिक डायमंड के 950 पीस, 27 मिमी के व्हाइट डायमंड के 4 पीस के साथ पिंक फ्लावर स्टोन के 37 पीस जड़े हुए हैं। इसके साथ ही 6 लाख कैरेट के वजन वाली भगवान सूर्य की नेचरल रूबी से बनी प्रतिमा की लंबाई 2.5 फुट है, जिसे बनने में 4 साल का समय लगा। यहां करीब 100 साल पुराने 400 प्रकार के 20 हजार से अधिक जैम स्टोन्स, गहने और स्टेच्यू के विभिन्न रूपों में प्रदर्शित किए गए हैं। यहां सैलानी लाइव फोक प्रोग्राम्स में पेट शो, लोक नृत्य, मैजिक शो, फोक सिंगिंग व लाख की चूडिय़ों को भी लाइव बनते देख सकते हैं।
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वैक्स म्यूजियम में आदमकद प्रतिमाएं
इसी प्रकार नाहरगढ़ में बने वैक्स म्यूजियम में लगी हुई देश विदेश की तकरीबन 36 जानी मानी हस्तियों की वैक्स से बनी आदमकद प्रतिमाएं देखने के लिए देश विदेश के सैलानी आते हैं। इनमें सचिन तेंदुलकर, अमिताभ बच्चन, दीपिका पादुकोण, महात्मा गांधी आदि के नाम शामिल हैं। वैक्स म्यूजियम के फाउंडर डायरेक्टर अनूप श्रीवास्तव कहते हैं कि अब पर्यटकों को कुछ नया चाहिए, हर बार एक ही तरह का डिस्प्ले अब उन्हें आकर्षित नहीं करता। पर्यटकों की पसंद को ध्यान में रखते हुए हम वैक्स म्यूजियम में नए बदलाव करते हैं और खजाना महल में भी ऐसा ही कुछ करने का प्रयास किया है।
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वॉर म्यूजियम में तीनों सेनाओं की शौर्य की गाथा
अमर जवान ज्योति पर तीनों सेनाओं के शौर्य को बयां करने वाला वॉर म्यूजियम देश के लिए प्राण न्यौछावर करने वाले वीर शहीदों को श्रद्धांजलि देने के लिए जनपथ पर अमर जवान ज्योति पर बनाया गया है। जहां भारतीय सेना के तीनों अंगों जल, थल व वायु सेना के बारे में जानकारियां, आजादी से पूर्व राजस्थान के वीर राजाओं व सेना की ओर से प्रयुक्त किए गए हथियार और युद्धों की जानकारी दी गई है।
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विधानसभा में बना डिजिटल म्यूजियम
राजस्थान विधानसभा में बना हुआ डिजिटल म्यूजियम प्रदेश के गौरवशाली राजनीतिक इतिहास को प्रदर्शित करने के साथ ही संसदीय कार्यवाही और व्यवस्था की कार्यप्रणाली की जानकारी भी देता है। 16 करोड़ रुपए की लागत से इसे 21 हजार वर्ग फीट में बनाया गया है प्रदेश के 13 सीएम और 17 विधानसभा अध्यक्षों की मोम की मूर्तियां भी हैं। दो मंजिला संग्रहालय में राजस्थान के 200 विधायकों का डिजिटल डाटा तैयार भी किया गया है। फिलहाल इसे आमजनता के लिए नहीं खोला गया है लेकिन स्कूल स्टूडेंट्स को इसकी विजिट करवाई जाती है।
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डिजिटल म्यूजियम में होगा गांधीजी के जीवन,दर्शन का अनुभव
बापू के जीवन से जुड़ी झलक देखने के लिए जल्द ही सेंट्रल पार्क में जेडीए की ओर से बनवाए जा रहे डिजिटल म्यूजियम में जा सकेंगे। 100 करोड़ रुपए की लागत से बनाए जा रहे इस म्यूजियम को 14500 वर्गमीटर में तैयार किया जा रहा है।