कोटा. राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) सेंट्रल जोन भोपाल की ओर से नियुक्त की गई टीम ने बुधवार से हेरिटेज चंबल रिवर फ्रंट का निरीक्षण किया। इस दौरान नगर विकास न्यास व वन विभाग की ओर से इसके दस्तावेज प्रस्तुत किए गए।
एनजीटी के निर्देश पर गठित चार सदस्य टीम के सदस्य बुधवार दोपहर जिला कलक्ट्रेड पहुंचे, जहां टीम ने जिला कलक्टर एमपी मीणा से मुलाकात की। टीम में राजस्थान राज्य जैव विविधता बोर्ड जयपुर के मुख्य तकनीकी प्रबंधक, जल संसाधन विभाग राणा प्रताप सागर व जवाहर सागर बांध के अधीक्षण अभियंता, राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल भोपाल के क्षेत्रीय निदेशक, एडीएम प्रशासन राजकुमार सिंह, यूआईटी सचिव मानसिंह समेत अधिकारियों के साथ चंबल रिवर फ्रंट पहुंचे और चंबल रिवर फ्रंट का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने चंबल रिवर फ्रंट के दस्तावेज व वन विभाग के दस्तावेज की भी जांच की और अधिकारियों से घडियाल अभयारण्य की सीमा के बारे में विस्तार से चर्चा की। एनजीटी की टीम बुधवार के बाद गुरुवार को भी दौरे पर रहेगी। अपने दो दिवसीय दौरे में दस्तावेज जमा कर टीम अपनी रिपोर्ट एनजीटी में प्रस्तुत करेगी।
इंजीनियर्स से की चर्चा
एनजीटी टीम बुधवार दोपहर कलेक्ट्रेड से सीधे चंबल रिवर फ्रंट के कुन्हाड़ी वाले किनारे पर पहुंची और यूआईटी के अभियंताओं को चंबल रिवर फ्रंट और घडियाल अभयारण्य के बारे में पूरी जानकारी ली। इस दौरान टीम ने वन विभाग व चंबल रिवर फ्रंट के दस्तावेजों की भी जांच की और रिवर फ्रंट का अवलोकन किया।
यह है मामला
कोटा में चंबल नदी पर कोटा बैराज से नयापुरा पुलिया तक नदी के दोनों चंबल रिवर फ्रंट विकसित किया गया है। 1442 करोड़ रुपए से बनाए गए रिवर फ्रंट में बाढ़ से सुरक्षा के लिए दीवार के अलावा दोनों और कई मोन्यूमेंट्स बनाए गए है। मामले में अजमेर निवासी अशोक मलिक और द्रुपद मलिक ने एनजीटी में याचिका दायर कर आरोप लगाया कि रिवर फ्रंट घडियाल अभयारण्य में बनाया गया है। इस मामले में एनजीटी ने जांच के लिए चार सदस्सीय टीम गठित की है। टीम का यह कोटा में पहला दो दिवसीय दौरा है। इसमें टीम रिवर फ्रंट की जानकारी जुटा कर एनजीटी कोर्ट को उपलब्ध करवाएगी।
व्यावसायिक गतिविधि पर भी नजर
एनजीटी में दायर याचिका में कहा गया है कि घडियाल अभयारण्य क्षेत्र में व्यावसायिक गतिविधियां की जा रही है, जो वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन एक्ट का उल्लंघन होने से अवैध है। निर्माण एजेन्सी ने पर्यावरण मंत्रालय से इसके निर्माण की स्वीकृति भी नहीं ली है।
– एडीएम प्रशासन व एनजीटी टीम सदस्य राजकुमार सिंह ने बताया कि मामले में जांच की जा रही है। इस मामले में जांच कर एनजीटी के लिए रिपोर्ट तैयार की जाएगी।