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Nagaur patrika…मिलीभगत के खेज में अनुबंधित बसों के पेटे साढ़े 11 अरब की राशि रोडवेज ने कर दी व्यय, चार हजार बसें आ सकती थी…VIDEO

नागौर. राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम के अधिकारियों की ओर से कथित रूप से सांठगांठ एवं कमीशनबाजी के खेल में निगम ने अनुबंधित बसों पर महज आठ साल में साढ़े 11 अरब से ज्यादा की राशि व्यय कर दिया। जबकि इतनी ही राशि में निगम चार हजार नई बढिय़ां बस खरीद सकता था। विशेष बात […]

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नागौर. राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम के अधिकारियों की ओर से कथित रूप से सांठगांठ एवं कमीशनबाजी के खेल में निगम ने अनुबंधित बसों पर महज आठ साल में साढ़े 11 अरब से ज्यादा की राशि व्यय कर दिया। जबकि इतनी ही राशि में निगम चार हजार नई बढिय़ां बस खरीद सकता था। विशेष बात यह है कि निगम की ओर से अनुबंधित बसों को प्रति किलोमीटर के हिसाब से न केवल अलग से राशि का भुगतान किया जा रहा है, बल्कि डीजल भी खुद की ओर से इनकी गाडिय़ों में डलवाया जाता है। डीजल व्यय की राशि जोडऩे पर यह आंकड़ा डेढ़ से दो गुना बढ़ जाता है।
कमीशनबाजी के खेल में बढ़ा रोडवेज को घाटा
राजस्थान राज्य परिवहन निगम के उच्चाधिकारी खुद के विभाग की ताबूत में कील ठोकने में लगे हुए हैं। कथित रूप से कमीशनबाजी की होड़ में अधिकारियों का अनुबंधित गाडिय़ों के प्रति बढ़ते प्रेम ने न केवल रोडवेज का बेड़ा गर्क कर दिया है, बल्कि घाटा राशि का आंकड़ा भी हर दिन बढ़ता जा रहा है। रोडवेज में वर्तमान में प्रदेश भर में कुल 862 अनुबंधित गाडिय़ों का संचालन किया जा रहा है। हर गाड़ी को प्रति किलोमीटर के हिसाब से 11 से 14 रुपए का भुगतान रोडवेज करता है। इस तरह से अनुबंधित गाडिय़ों पर ही एक माह में व्यय राशि का आंकड़ा 12 करोड़ पार कर जाता है। यह स्थिति तब है, जबकि रोडवेज को एक दिन में 5.42 करोड़ का राजस्व प्राप्त होता है, और 6.32 करोड़ की राशि का व्यय हो जाता है। यानि की अनुबंधित गाडिय़ों से इतर एक माह में रोडवेज के विशुद्ध रूप से घाटे का आंकड़ा 27 करोड़ के पार पहुंच जाता है। इस तरह से रोडवेज का आठ साल में घाटा केवल अनुबंधित गाडिय़ों के पेटे जोडऩे पर आंकड़ा दो हजार करोड़ पार पहुंच जाता है। इसमें अनुबंधित गाडिय़ों की प्रति किलोमीटर दी जाने वाली राशि जोडऩे पर घाटे का आंकड़ा तीन गुना बढ़ जाता है। फिर भी रोडवेज के अधिकारियों का अनुबंधित गाडिय़ों से प्रेम घटने की जगह बढ़ा है।
एक नजर इस पर
अनुबंधित गाडिय़ों की संख्या-862
रोडवेज बसों की कुल संख्या-2921
एक माह में अनुबंधित गाडिय़ों पर प्रति किमी. किराए की व्यय राशि-121,360,980
एक साल में अनुबंधित गाडिय़ों पर प्रति किमी. किराए की व्यय राशि-1,456,331,760
8 साल में अनुबंधित गाडिय़ों पर एक साल में प्रति किमी. किराए की व्यय राशि-11,650,654,080

अनुबंधित को लाभ देने के लिए दो बार बदले प्रावधान
रोडवेज की ओर से अनुबंधित गाडिय़ों की संख्या रोडवेज के बेड़े में बढ़ाने के लिए दो बार विभागीय प्रावधानों में अब तक बदलाव किया जा चुका है। पहले प्रावधान था कि 10 प्रतिशत से ज्यादा अनुबंधित गाडिय़ां नहीं ली जा सकती है, लेकिन कमीशनबाजी के खेल में इसको बदलकर 20 प्रतिशत कर दिया। इसके बाद भी स्थिति नहीं बदली, बल्कि और बिगड़ गई, जब फिर से प्रावधान बदलते हुए 30 प्रतिशत कर दिया गया। इसके अलावा वर्ष 2003-04 में यह प्रावधान था कि अनुबंधित गाडिय़ों को पांच रुपए प्रति किलोमीटर से ज्यादा भुगतान नहीं किया जा सकता। मिलीभगत के खेल में इसे भी बदलकर अनुबंधित बसों के किराए में बढ़़ोत्तरी कर दी गई।
अनुबंधित के पेटे व्यय राशि में खरीदी जा सकती थी चार हजार बसें
रोडवेज की ओर से आठ साल में अनुबंधित गाडिय़ों पर साढ़े 11 अरब से ज्यादा की राशि का व्यय किया जा चुका है। रोडवेज के जानकारों के अनुसार एक बस तकरीबन 38 लाख तक आ जाती है। इस तरह से विभाग ने यही राशि यदि बसों की खरीद में व्यय की होती तो फिर अब तक रोडवेज 4 हजार नई बढिय़ां बसे खरीद चुका होता।
करोड़ों की राशि देने के साथ डीजल फ्री
रोडवेज की ओर से अनुबंधित बसों पर प्रति किलोमीटर किराए की दर अदा करने के साथ ही रोजाना 411 किलोमीटर तक सफर तय करने के डीजल भी रोडवेज की ओर से इनको दिया जा रहा है। अनुबंधित बसों को डीजल देने के एवज में कोई शुल्क विभाग की ओर से नहीं लिया जाता है। यानि की जैसे-तैसे हर तरह से रोडवेज के उच्चाधिकारी अनुबंधित बसों को अधिकाधिक मुनाफा पहुंचाने में लगे हुए हैं।
इनका कहना है…
अनुबंधित वाहन लेने से रोडवेज का घाटा बढ़ रहा है । सरकार यदि अनुबंधित वाहन की जगह निगम अपनी स्वयं की वाहन लोन लेकर भी वाहन खरीद करे तो 3 से 4 वर्ष में वाहन लोन फ्री हो जाती है । सरकार सिर्फ लोन गारंटी दे तो संभव है घाटा समाप्त हो सकता है
सत्यनारायण शर्मा, प्रदेश महामंत्री,राजस्थान परिवहन निगम संयुक्त कर्मचारी फैडरेशन, जयपुर
क्या कहते हैं अधिकारी…
रोडवेज की बेहतरी के लिए विभाग की ओर से हरसंभव कदम उठाए जा रहे हैं। इस संबंध में विभागीय उच्चाधिकारियों के दिशा-निर्देशों के अनुसार ही कार्य किया जाता है।
रवि सोनी, कार्यकारी निदेशक (यांत्रिक) राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम जयपुर