नागौर. जिला मुख्यालय पर जिम्मेदारों के रहते हुए भी नागौर का इतिहास खण्ड-खण्ड होकर पानी में डूब रहा है, लेकिन प्रशासन बेफिक्र बना हुआ है। मामला शहर के समस तालाब में स्थित बारादरी का है। कभी यहां पर शासक के तौर पर रहे शमसुद्दीन का राज हुआ करता था। बताते हैं कि 15वीं शताब्दी में खुद शमसुद्दीन ने इसका निर्माण कराया था। इसी बारादरी पर बैठकर वह जनता की फरियाद सुना करता था। आज यह बारादरी खुद ही फरियाद बन गई है। समस तालाब में जा रहे नालों के गंदे पानी की गंदगी में इसका दम घुटने के साथ ही कई जगहों से यह जीर्ण-शीर्ण होकर अब टूटने लगा है। इसके गिरते टुकड़ों के साथ इसका पूरा इतिहास भी अब पानी में गुम होने के कगार पर पहुंच गया है। इसके बाद भी इसकी ओर ध्यान देने की फुरसत अधिकारियों को नहीं है। जानकारों की माने तो इसके टूटने के साथ ही कथित रूप से जमीन के कब्जे की होड़ में लगे भूमाफिया यहां पर भी इसे सुखाकर इस पर काबिज होने की साजिशों में लगे हुए हैं।
तालाब की जमीनों पर कब्जे की होड़
शहर के तालाबों के जमीनों पर अवैध रूप से कब्जे की होड़ लगी है। कई जगहों पर यह काम चुपचाप और तेजी से किया जा रहा है। इसी क्रम में समस तालाब को भी इतिहास से अलग करने में भूमाफिया जुट गए हैं। हालांकि तालाब के इर्द-गिर्द के काफी बड़े भूभाग पर कब्जा करने में यह सफल भी हो चुके हैं, और जो भूभाग बचा हुआ है। उसको भी यह निगलने की सािजशें बुन रहे हैं। मंगलवार को समस तालाब की हुई पड़ताल में सामने आया कि तालाब में खड़ी बारादरी जमींदोज होने के कगार पर पहुंच की है। स्थानीय बाशिंदों ने इस संबंध में पूर्व में भी जिला प्रशासन को अवगत कराया था, लेकिन जिम्मेदारों ने ध्यान नहीं दिया।
बारादरी बताती है तालाब की गहराई
करीब 15 वी ई. में तत्कालीन शासक समसुदीन द्वारा इस बारहदरी का निर्माण कराने का उल्लेख इतिहास के पत्रों में आता है। तालाब के किनारे उत्कृष्ट कलाकारी के द्वारा पत्थरों को तराश कर बनाई गई है। डिजाईनदार पत्थर के एक दर्जन खंभों पर खड़ी बारहदरी खुद-ब-खुद अपना इतिहास बताते हुए नजर आती है। तालाब की गहराई का आंकलन भी इससे किया जाता था। तालाब की बराबर ऊंचाई पर बनी यह बारहदरी पूरा तालाब भर जाने पर डूबने पर लोग समझ लेते थे कि अब पानी कभी भी अपनी सीमा तोडकऱ बाहर आ सकता है। इससे लोग इस तरह का अनुमान लगाकर पहले से ही बचाव का इंतजाम करने में जुट जाते थे।
इनका कहना है…
प्राकृतिक जलस्रोत के रूप में तालाब की देखभाल करने का जिम्मा विशेष रूप से स्थानीय निकायों का रहता है। समस तालाब के वस्तुस्थिति की जानकारी तो नहीं है, लेकिन फिर भी इस संबंध में जल्द ही आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
एडीएम, चंपालाल जीनगर, नागौर