नागौर. जिले से गुजरने वाले राष्ट्रीय राजमार्गों और प्रमुख स्टेट हाईवे पर स्थित होटल, ढाबे और रेस्टोरेन्ट अब सुविधा केंद्र कम और अव्यवस्था के अड्डे ज्यादा नजर आने लगे हैं। स्थिति यह है कि नगर परिषद, राजस्व विभाग, फूड सेफ्टी और अग्निशमन विभाग के पास तक यह स्पष्ट रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है कि जिले में हाईवे किनारे संचालित कितने होटल वास्तव में वैध हैं, और कितने बिना अनुमति वर्षों से कारोबार कर रहे हैं। इसके बावजूद इन होटलों में रोजाना सैकड़ों यात्री भोजन करते हैं, रुकते हैं, और अपनी सुरक्षा पूरी तरह सिस्टम के भरोसे छोड़ देते हैं।
संख्या तो बढ़ी, लेकिन मापदण्ड टूटे
शहर से जुड़े विभिन्न मार्गों पर होटलों की संख्या में गत दो से तीन सालों में लगातार बढ़ोत्तरी हुई है, लेकिन इसके साथ ही सबसे गंभीर पहलू यह है कि अधिकांश होटलों में अग्नि सुरक्षा मानकों का पालन नहीं हो रहा। फायर एनओसी, अग्निशमन उपकरण, आपातकालीन निकास मार्ग और सुरक्षा संकेत या तो मौजूद ही नहीं हैं या केवल औपचारिकता के तौर पर लगाए गए हैं। कई जगहों पर रसोई गैस सिलेंडर असुरक्षित तरीके से रखे हुए हैं, बिजली के खुले तार हैं, और आग लगने की स्थिति में बाहर निकलने का कोई स्पष्ट रास्ता नहीं है। इसके बावजूद वर्षों से इन होटलों का संचालन बेरोकटोक जारी है।
फूड सेफ्टी का भी नहीं रखा ध्यान
फूड सेफ्टी के मामले में भी हालात चिंताजनक हैं। हाईवे के होटलों में परोसे जा रहे भोजन की गुणवत्ता, किचन की स्वच्छता, खाद्य सामग्री की एक्सपायरी और स्टोरेज को लेकर नियमित जांच नहीं हो रही। विभागीय कार्रवाई अक्सर केवल कागजों तक सीमित रहती है। मौके पर निरीक्षण की बजाय नोटिस और रिपोर्ट की प्रक्रिया पूरी कर ली जाती है, जिससे वास्तविक स्थिति कभी सामने ही नहीं आ पाती। इसके साथही पार्किंग व्यवस्था भी एक बड़ा सवाल है। अधिकांश होटल हाईवे किनारे बिना निर्धारित पार्किंग के संचालित हैं। भारी वाहन, बसें और कारें सीधे सडक़ किनारे खड़ी हो जाती हैं। जिससे दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बना रहता है। बावजूद इसके न तो परिवहन विभाग की ओर से सख्त कदम उठाए जा रहे हैं और न ही राजस्व या नगर परिषद स्तर पर कोई ठोस नियंत्रण दिखाई देता है।
निरीक्षण या कागजी खानापूर्ति
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि ये होटल नियमों पर खरे हैं, तो फिर समय-समय पर संयुक्त निरीक्षण और सार्वजनिक रिपोर्ट क्यों नहीं की जाती। और यदि नियमों का उल्लंघन हो रहा है, तो वर्षों से इनके खिलाफ निर्णायक कार्रवाई क्यों नहीं हुई। हाईवे यात्रियों की सुरक्षा और स्वास्थ्य सीधे तौर पर इन होटलों से जुड़ा हुआ मामला है, लेकिन संबंधित विभागों की निष्क्रियता इस पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर रही है। स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि कई होटल बिना भूमि उपयोग परिवर्तन, बिना लाइसेंस और बिना आवश्यक अनुमतियों के संचालित हैं। फिर भी न तो इन्हें सील किया जा रहा है और न ही इनके खिलाफ स्थायी कार्रवाई की जा रही है। कभी-कभार होने वाली दिखावटी कार्रवाई के बाद मामला फिर ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है। हकीकत यह है कि सालों से नगर परिषद, राजस्व, फूड सेफ्टी, फायर और ट्रेफिक पुलिस की ओर से इनकी कभी जांच ही नहीं की गई।
समझाइश तो की जाती है…
होटलों एवं रेस्टोरेन्टों में खाद्य पदार्थों के संदर्भ में अक्सर अभियान चलाकर समझाइश की जाती है। करीब दो माह पूर्व भी चला था अभियान। अब जल्द ही इन होटलों एवं रेस्टोरेन्टों आदि की जांच की जाएगी। मापदण्ड का उल्लंघन मिला तो फिर कार्यवाही करेंगे।
संदीप अग्रवाल, खाद्य सुरक्षा अधिकारी, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग नागौर
जांच में नहीं मिले तो कार्यवाही
होटलो एवं रेस्टोरेन्टों आदि में सुरक्षा के साथ अग्निशमन आदि के स्थिति की जांच कर ली जाएगी। इसके साथ ही यह भी देखा जाएगा कि इनमें असेंबली प्वाइंट है कि नहीं। जांच में नहीं मिले तो इन पर कार्यवाही की जाएगी।
गोविंद सिंह भींचर, आयुक्त नगरपरिषद नागौर