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Nagaur patrika…जिला प्रशासन नहीं सौंप रहा नगरपरिषद को उसकी 822 बीघा भूमि…VIDEO

नागौर. राज्य सरकार की ओर से आदेश होने के बाद भी पेराफेरी क्षेत्र के कई किलोमीटर एरिया के रेंज में आने वाली भूमि अब तक नगरपरिषद को सौंपी नहीं गई है। हालांकि नगरपरिषद की ओर से भूमि का चिह्नांकन कर 94 खसरों की सूची प्रशासन को सौंपी गई थी, लेकिन तहसील प्रशासन ने इनमें से […]

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नागौर. राज्य सरकार की ओर से आदेश होने के बाद भी पेराफेरी क्षेत्र के कई किलोमीटर एरिया के रेंज में आने वाली भूमि अब तक नगरपरिषद को सौंपी नहीं गई है। हालांकि नगरपरिषद की ओर से भूमि का चिह्नांकन कर 94 खसरों की सूची प्रशासन को सौंपी गई थी, लेकिन तहसील प्रशासन ने इनमें से केवल 35 खसरों को सौंपने पर सहमति जताई गई थी। विशेष बात यह रही जिन 35 खसरों को सौंपने पर सहमति जताई गई थी, उसे भी प्रशासन की ओर से अब तक सौंपा नहीं गया। नगरपरिषद के अधिकारियों का कहना है कि प्रशासन की ओर से भूखण्डों को सौंप दिया गया होता तो फिर इन भूमियों पर योजनाओं का संचालन कर शहर का विकास कराने के साथ ही हजारों की संख्या में पट्टे भी जारी किए जाते।
नगरपरिषद ने तहसील प्रशासन को दिए थे 94 खसरे
राज्य सरकार की ओर से वर्ष 2010 में पेराफेरी क्षेत्रों की भूमियों का चिह्नांकन कर उसको स्थानीय निकायों को सौंपने के आदेश दिए गए थे। इसी क्रम में नागौर नगरपरिषद को भी 822 बीघा भूमि मिलनी थी। इस संबंध में जिला प्रशासन की ओर से सक्रियता नहीं दिखाए जाने के बाद भी नगरपरिषद की ओर से पेराफेरी क्षेत्र के भूमियों को चिह्नित कर उनके खसरे तहसील प्रशासन को सौंप दिए थे। नगरपरिषद के अधिकारियों की माने तो करीब 822 बीघा भूमि पेराफेरी क्षेत्रों की है। जो परिषद को मिलनी चाहिए। इसके बाद भी तहसील प्रशासन की ओर से केवल 35 खसरों पर ही सहमति जताई गई। इस पर नगरपरिषद की ओर से प्रशासन के समक्ष तथ्यात्मक ब्योरे रखकर समझाने का प्रयास किया गया, लेकिन बात नहीं बनी। इस संबंध में नगरपरिषद कीओर से प्रशासन को अब तक 61 स्मरण पत्र भेजे गए। इसके बाद भी अब तक इन क्षेत्रों के यानि की पेराफेरी क्षेत्र की भूमि का सौंपने के लिए जिला प्रशासन की ओर से कोई कवायद भी शुरू नहीं की गई। इसकी वजह से स्थिति विकट होने लगी है।
राज्य सरकार ने यह दिए थे आदेश
आठ दिसंबर 2010 में राज्य सरकार ने यह आदेश दिया था कि नगरीय निकाय क्षेत्र व पैराफेरी क्षेत्र में स्थित समस्त प्रकार की राजकीय भूमि (सिवाय चक, चारागाह, गैर मुमकिन आबादी आदि) जिला कलक्टर नगरीय निकायों को हस्तांतरित करे।
सौंपने के दिए गए थे आदेश
बताते हैं कि इसके पश्चात वर्ष 2021 में भी पूर्व स्वायत्त शासन विभाग के तत्कालीन शासन सचिव भवानी सिंह दैथा एवं निदेशक तथा विशिष्ट सचिव रहे दीपक नंदी ने राज्य सरकार के आदेशों का हवाला देते हुए जिला कलक्टर को दिशा-निर्देश दिए थे। उसमें कहा गया था कि पेराफेरी क्षेत्र के भूखण्ड का सीमांकन इसे सौंपने की प्रक्रिया को जल्द ही पूर्ण किया जाना चाहिए। इसके बाद भी स्थिति में सुधार नहीं आया।
इन क्षेत्रों में हैं जमीनें
पेराफेरी एवं नगरीय सीमा में स्थित अन्य सभी प्रकार की भूमि नागौर, अठियासन, मानासर, चैनार, ढूंढीवास एवं दुकोसी आदि क्षेत्रों में हैं। इस प्रकार की भूमि के कुल खसरों की संख्या 49 बताई जाती है। परिषद के सूत्रों के अनुसार यदि व्यवस्थित तरीके से जांच की जाए तो यह आंकड़ा और बढ़ सकता है।
इनका कहना है…
राज्य सरकार के आदेश का हवाला देते हुए जिला कलक्टर से मिलकर पेराफेरी सहित सभी प्रकार की नगरीय सीमा में स्थित राजस्व भूमि सौंपने के लिए आग्रह किया गया है। इसमें प्रत्येक का खसरा नंबर भी लिखा गया है। उसके बाद भी भूमि नगरपरिषद को हस्तांतरित नहीं की गई। भूमि नगरपरिषद को मिलने पर निश्चित रूप से योजनाओं के माध्यम से जनता को लाभान्वित किया जाता।
मीतू बोथरा, सभापति नगरपरिषद, नागौर
नगरपरिषद की ओर से पेराफेरी क्षेत्रों की भूमियों के हस्तांतरण के लिए प्रशासनिक स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं। उम्मीद है कि जल्द ही इसमें सफलता मिलेगी।
रामरतन चौधरी, आयुक्त नगरपरिषद नागौर