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एक माह तक शुभ कार्यों पर पर लगा रहेगा विराम…VIDEO

-खरमास में गृह प्रवेश, सगाई, मुंडन, जनेऊ संस्कार और कान छेदन, गृह निर्माण आदि का रहता है निषेधनागौर. पंद्रह दिसंबर से मलमास (खरमास) लग रहा है। ज्योतिर्विद आचार्य दिनेश प्रेम शर्मा ने बताया 15 दिसंबर मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि से सूर्य के गोचरवश धनु राशि में प्रवेश करने के कारण ‘मलमास’ प्रारंभ होगा। […]

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-खरमास में गृह प्रवेश, सगाई, मुंडन, जनेऊ संस्कार और कान छेदन, गृह निर्माण आदि का रहता है निषेध
नागौर. पंद्रह दिसंबर से मलमास (खरमास) लग रहा है। ज्योतिर्विद आचार्य दिनेश प्रेम शर्मा ने बताया 15 दिसंबर मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि से सूर्य के गोचरवश धनु राशि में प्रवेश करने के कारण ‘मलमास’ प्रारंभ होगा। यह 14 जनवरी 2025 माघ कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि तक मान्य रहेगा। इस अवधि में ‘मलमास’ (खरमास) प्रभावी होने के कारण समस्त शुभ कार्यों का निषेध रहेगा। इसके बाद मांगलिक कार्य शुरू हो सकेंगे। 16 जनवरी से शहर में शहनाइयों की गूंज शुरू हो जाएगी। गृह प्रवेश, सगाई, मुंडन, जनेऊ संस्कार और कान छेदन, गृह निर्माण की शुरूआत के साथ नए व्यापार की शुरू कर सकते हैं। इस साल विवाह के 38 मुहूर्त हैं, लेकिन मई व जून में शहनाई नहीं गूंजेगी। मई व जून में विवाह के शुभ मुहूर्त नहीं हैं। सबसे ज्यादा मुहूर्त फरवरी में हैं। इस महीने 11 मुहूर्त हैं। इस कारण बैंड बाजा, बारात की धूम रहेगी। खरमास खत्म होने पर बाजार में भी बूम आएगा। शादियों की खरीदारी बढ़ेगी, इससे बाजार में रौनक लौटेगी। शास्त्री व आचार्य शर्मा का कहना है कि इस साल शादी के काफी शुभ मुहुर्त हैं। 15 जनवरी के बाद शुभ कार्य भी शुरू हो सकेंगे। सूर्य के धनु राशि व मीन राशि में स्थित होने की अवधि को ही ‘मलमास’ या ‘खरमास’ कहा जाता है। ‘खरमास’ में सभी प्रकार के शुभ कार्य- जैसे विवाह, मुंडन, सगाई, गृहारंभ व गृह प्रवेश के साथ व्रतारंभ एवं व्रत-उद्यापन आदि वर्जित रहते हैं।
खरमास के दौरान यह नहीं करना चाहिए
नया घर खरीदना या गृह प्रवेश, नए व्यापार की शुरुआत, शादी, मुंडन, जनेऊ, सगाई आदि कार्य नहीं करना चाहिए। इसके साथ ही16 संस्कारों वाले कार्य करने की मनाही है।

खरमास के दौरान क्या करना चाहिए
प्रतिदिन सूर्य को जल अर्पित करना, पशुओं और पक्षी की सेवा करना, भगवान विष्णु और तुलसी की पूजा करना, जप, तप और दान करने के साथ ही . गंगा या अन्य पवित्र नदी में स्नान करना चाहिए।
मलमास में चार त्रिपुष्कर योग रहेंगे इस बार
पंडित सुनील दाधीच ने बताया कि मलमास के बीच चार- चार त्रिपुष्कर योग है. इसमें जप, तप,दान पुण्य, हवन, पूजन और तीर्थ स्नान करने का कोटि गुना फल प्राप्त होता है। ज्योतिष एवं खगोलीय विज्ञान के अनुसार पंचांगों की गणित के आधार से सन 2024 के आखरी दिसंबर माह में मलमास के मध्य में चार-चार त्रिपुष्कर योग बन रहे हैं। पंचांग और ज्योतिष गणना के अनुसार 17 दिसंबर मंगलवार को सुबह 7 बजकर 8 मिनट से 10 बजकर 56 मिनट तक और 21 दिसंबर 2024 शनिवार को रात्रि में 6 बजकर 14 मिनट से 7 बजकर 11 मिनट तक और 22 दिसंबर रविवार सर्वार्थ सिद्धि योग में सुबह 7 बजकर 11 मिनट से दोपहर 2 बजकर 32 मिनट तक अंतिम योग दिसंबर में 31 दिसंबर 2024 मंगलवार को रात्रि 3 बजकर 22 से सुबह 7 बजकर 14 मिनट तक यह सर्वश्रेष्ठ योग रहेगा। मान्यता है कि इस योग में तीर्थ में स्नान, ब्रह्म सरोवर में स्नान, दान पुण्य, हवन अनेक प्रकार के धार्मिक ग्रंथ का पठन,श्रीमद् भागवत महापुराण, श्री रामचरितमानस का पाठ तथा अन्य पाठ,पूजन करने से तीन गुना फल मिलता है। इन योग में मलमास के दौरान दान पुण्य करने से तीन गुना फल के साथ मलमास का पुण्य भी मिलेगा। त्रिपुष्कर योग में ब्रह्मा सरोवर, मध्य सरोवर, रुद्र सरोवर में स्नान, पूजन, दान पुण्य, हवन करने से कोटि गुना फल लिखा है। एक वस्तु देने से तीन वस्तु का फल मिलेगा। एक पाठ करने से तीन पाठ का फल मिलेगा। एक माला जप करने से तीन माला जप करने का फल मिलेगा। ऐसा वेदों में वर्णित है।