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VIDEO…चावलों से बनी रंगोली, चांदी से हुई आंगी की सजावट

नागौर. श्वेतांबर खतरगच्छ समाज में चल रहे पर्यूषण पर्व में बुधवार को जैन मंदिरों में सजावट, रोशनी एवं आंगी रचनाएं बनाई गई। हीरावाड़ी स्थित आदिनाथ भगवान के मंदिर में दादा आदेश्वर, दादा गुरुदेव के पगलियों व अधिष्ठायक देव भैरूजी की विशेष आकर्षक आंगी रचना कल्प खजान्ची, विकास बोथरा, कुशल खजान्ची, विनय बोथरा, प्रदीप डागा, अंकित […]

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नागौर. श्वेतांबर खतरगच्छ समाज में चल रहे पर्यूषण पर्व में बुधवार को जैन मंदिरों में सजावट, रोशनी एवं आंगी रचनाएं बनाई गई। हीरावाड़ी स्थित आदिनाथ भगवान के मंदिर में दादा आदेश्वर, दादा गुरुदेव के पगलियों व अधिष्ठायक देव भैरूजी की विशेष आकर्षक आंगी रचना कल्प खजान्ची, विकास बोथरा, कुशल खजान्ची, विनय बोथरा, प्रदीप डागा, अंकित डागा ने की। इसमें पुजारी चन्द्रप्रकाश बोहराका भी सहयोग रहा। आंगी रचना में विशेष प्रकार के रंगीन स्टोन, मोती, लेश, मैदा लकड़ी, चमकी आदि समान का उपयोग करते हुए चांदी की आंगी पर सजावट की गई है। इसके बाद सजी हुई चांदी की आंगी भगवान को पहनाई गई। ईशा खजांची, कल्प खजांची, नलिनी खजांची व कुशल खजान्ची ने पाट पर रंगीन चावलों से भगवान की माता को आए हुए चौदह सपनों की विशेष रंगोली बनाई। भास्कर खजांची ने बताया कि जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ श्री संघ में विकास बोथरा के अखण्ड उपवास का बुधवार को पांचवां दिन रहा। मन्दिर में आंगी रचना व रंगोली को देखने को देखने के लिए श्रावक-श्राविकाओं की भीड़ रही। विशेष आंगी रचना करवाने का लाभ जबरमल, हस्तीमल, प्रकाशमल, चंचलमल, माणक, अनिल व सरदारमल बच्छावत को मिला। मन्दिर में आकर्षक लाईटिंग करवाने का लाभ अरबन बैंक के उपाध्यक्ष केवलराज, तरुणकुमार, ऋत्विक व वेदांस बच्छावत को मिला।
कृतघ्न पुत्रों को महावीर स्वामी के जीवन दर्शन से लेनी चाहिए प्रेरणा
नागौर. काली पोल स्थित कनक आराधना भवन में प्रवचन करते हुए साध्वी मृगावती ने कहा कि तीर्थकर भगवान गर्भ में मति, श्रुत और अवधि ज्ञान सहित होते हैं। चौथा ज्ञान मन पर्यव तो ज्ञान दीक्षा लेने पर प्राप्त होता है, और पांचवां ज्ञान उत्कृष्ट कोटि की साधना करने पर मिलता है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक तीर्थकर और चक्रवर्ती की माता चौदह शुभ स्वप्र देखती हैं। इसमें गज,ऋषभ,सिंह, लक्ष्मी,फुलमाला,पुर्ण चन्द्र,सुर्य ध्वजा,कलश,पदम सरोवर,क्षीरसमुद्, देव विमान, रत्नों की राशि, अग्नि शिखा आदि के दृश्य रहते हैं। वर्तमान समय में लोगों को नसीहत देते हुए कहा कि कृतघ्न पुत्रों को महावीर के जीवन दर्शन से प्रेरणा लेनी चाहिए। इस दौरान साध्वी सुप्रिया एवं साध्वी नित्योदया ने भी महावीर जन्म का वाचन किया। कार्यक्रम में भगवान को पालना में झुलाने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ रही। पारणा की बोली का लाभ विमलचन्द, विकास, विनय, विवेक बोथरा को मिला।