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महंत धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री के आंख से निकले आंसू, श्रद्धालुओं का मन चित्कार उठा

हम पैदल चले। सब्जी तो कभी मिली ही नहीं। भूखे रहे, उपेक्षा झेली, धक्के खाए। भगवान ऐसा दिन किसी को न दिखाए। यह कहकर बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की आंखें छलक आई।

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भीलवाड़ा। हम पैदल चले। सब्जी तो कभी मिली ही नहीं। भूखे रहे, उपेक्षा झेली, धक्के खाए। भगवान ऐसा दिन किसी को न दिखाए। यह कहकर बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की आंखें छलक आई।

शहर के तेरापंथ नगर में पांच दिवसीय हनुमंत कथा के अंतिम दिन रविवार को करीब एक लाख श्रद्धालुओं से खचाखच भरे पांडाल में अपने पारिवारिक अतीत का जिक्र करते शास्त्री का गला रूंध गया। गमछे से आंसू पोंछते शास्त्री थोड़ा रूके और बोले-गरीब का कोई नहीं होता। गरीब के सिर्फ हनुमानजी महाराज हैं।

अमीर कभी गरीब की मदद नहीं करता, लेकिन जब गरीब से जरूरत पड़ती है तो उसके आगे-पीछे घूमते हैं। काम निकलने के बाद गरीब की फिर वही स्थिति कर देते हैं। शास्त्री ने सीख दी कि जीवन में कोई गरीब-जरूरतमंद आए तो उसकी मदद जरूर करो। भगवान आपको ऐसा दिन ना दिखाए कि दर-दर की ठोकरें खानी पड़ी। शास्त्री की आंखों में आंसू देख श्रोता भी भावुक हो गए। कई महिलाएं अपने आंसूओं का सैलाब नहीं रोक पाई।

असल में शास्त्री कथा के अंतिम दिन ईश्वर की भक्ति और कृपा की महिमा की चर्चा कर रहे थे। इसी दौरान अपने बचपन और परिवार की गरीबी का जिक्र किया। पुराने संघर्ष के दिन याद कर आंखें छलछला गई व गला भर आया। वे बोले-हम तो हनुमानजी के नाम पर खाते हैं। उनके जैसा दाता न हुआ है न होगा।

सनातन, राजनीति, गोसेवा समेत विभिन्न मुद्दों पर चर्चा

राजस्थान बीज निगम के पूर्व अध्यक्ष एवं कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव धीरज गुर्जर ने शनिवार देर रात बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री से रामेश्वरम में मुलाकात की। सनातन, राजनीति, गोसेवा समेत विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई।

शनिवार रात को रामेश्वरम में प्रशनोत्तरी हुई। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। इस दौरान धीरज रामेश्वरम पहुंचे। यहां उनकी बंद कमरे में पंडित शास्त्री से मुलाकात हुई। विभिन्न मुद्दों पर मंत्रणा हुई। भीलवाड़ा समेत राजस्थान की राजनीति के बारे में गुर्जर से शास्त्री ने चर्चा की। शास्त्री ने अपनी लिखी पुस्तक भी धीरज को भेंट की। धीरज के साथ उनके भाई नीरज एवं अन्य रिश्तेदार साथ थे।