
हरा लिबास पहने युवकों, बुजुर्गों और बच्चों ने चमचमाती तलवारों से हाईदौस में हिस्सा लिया।
मोहर्रम पर बुधवार को मुस्लिम समुदाय के लोग हजरत इमाम हुसैन की याद में गमजदा हो गए। तारागढ़ पर शिया समुदाय ने खुद को रक्त रंजित कर खिराज-ए-अकीदत पेश की। ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती की दरगाह के अंदरकोट इलाके में तलवारों से बड़ा हाईदौस खेला गया। बाद में गमजदा माहौल में ताजिया शरीफ को झालरे और जलाशयों में सैराब किया गया। अधिकांश मुस्लिम घरों में चूल्हे नहीं जले।