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अवैध सम्बन्धों को जन्म न दें!

शुरू में तो वह इसे अपना मन बहलाव समझती हैं और बाद में सम्बन्ध सीमाऐं पार कर लेते हैं जो सुखी जीवन को बरबाद करने वाले होते हैं

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Sunil Sharma

Oct 29, 2017

women girl

women girl depression

- चन्द्रकान्ता शर्मा

आजकल, कुंवारी कन्याओं के अलावा विवाहिता महिलाओं में भी दूसरे पुरूषों से सम्बन्ध बनाए जाने की प्रवृति बढने लगी है। यही नहीं तीन-चार बच्चों की माऐं भी अनेक बार ऐसी घटनाऐं कर बैठती हैं, जिससे उनके सूखी और खुषहाल गृहस्थ जीवन में यकायक आग भभक उठती है। जिससे वे दर-दर की ठोकरें खाती हैं तथा रोटी को मोहताज हो जाती हैं। समाज में उनसे कोई बात नहीं करना चाहता और एक दिन कुण्डित होकर या तो आत्महत्या कर लेती हैं या स्वतः ही अकाल काल कवलित हो जाती हैं।

अक्सर देखने सुनने में आया है कि घर में अकेली रहने वाली महिलाऐं कुछ अन्य काम न करने से बोर होकर या तो किसी पड़ौसी या फिर किसी अपने मुंह बोले भाई अथवा सहपाठी से सम्बन्ध कायम कर लेती हैं। शुरू में तो वह इसे अपना मन बहलाव समझती हैं और बाद में सम्बन्ध सीमाऐं पार कर लेते हैं जो सुखी जीवन को बरबाद करने वाले होते हैं। जो महिलाऐं ऐसा करती हैं, वे यह सोचती हैं कि जो कुछ कर रही हैं उसका अन्य किसी को पता नहीं है, जबकि स्थिति यह होती है कि वही बात मोहल्ले के लोगों में चर्चा बन जाती है या फिर लोग चुपके-चुपके ऐसी बातों का जिक्र करते रहते हैं।

एक दिन ऐसा आता है जब उस महिला के घरवालों अथवा पति महाषय का उसकी करतूतों का पता चल जाता है जिससे गृह कलह से तलाक तक की नौबतें आ जाती हैं। इन महिलाओं में अधिकांष ऐसी महिलाओं के केस ज्यादा देखने-सुनने को मिले हैं जिनके पति या तो ज्यादा समय दफ्तर में देते हैं और थके-हारे रात तक घर लौटते हैं, या जिनके पति बाहर नौकरी करते हों और जो सालभर में दो-चार बार अपने घर लौटते हों। ऐसे भी कुछ मामले प्रकाष में आए हैं।

कुछ महिलाओं के विवाह पूर्व ही कुछ पुरूषों से अवैध सम्बन्ध रहे हैं और वे उन्हें विवाह बाद तक या तो आदतन या मजबूरन बनाए रखती हैं। कई महिलाऐं भी अपनी भावनाओं को नहीं दबा पातीं और पति के अलावा, पति के मित्रों अथवा पड़ौसियों से सम्बन्ध बढ़ाकर के चक्कर में रहती हैं। लेकिन यह सब ज्यादा दिन नहीं चलता और ये अबंध सम्बन्ध एक दिन उद्धाटित हो जाते हैं, जो उनके व्यक्तित्व का सर्वनाष कर देते हैं। अपने परिवार व बच्चों तक में मुंह दिखाने लायक नहीं रहती हैं। इसके लिए होना यह चाहिए कि महिलाऐं यदि अकेली हैं तो वे अपने को किसी न किसी प्रकार के कार्य में एंगेज रखें। कढ़ाई-बुनाई सिलाई, कमरों की सफाई, कपड़ों की धुलाई तथा शेष समय में पड़ोस की अच्छी गृहिणियों से हंस बोलकर समय बिता लें।

आजकल पत्र-पत्रिकाऐं भी समय गुजारने के लिए अच्छी साथी हैं। इसके लिए उच्चकोटि की सामाजिक पारिवारिक पत्रिकाऐं नियमित पढ़कर भी व्यर्थ का समय गुजारा जा सकता है। स्वस्थ मनोरंजन वाली पत्रिकाऐं ही पढ़नी चाहिए। यदि आप पढ़ी लिखी हैं तो समय पास करने के लिए पार्ट टाइम जाब ढूंढ़ लीजिए या फिर अपने घर पर छोटे-छोटे बच्चों का टयूषन लगा लीजिए आपका समय गुजर जाएगा।

आप बच्चों की माँ हैं तो उनकी पढ़ाई-लिखाई में रूचि लें। उन्हें पढ़ाऐं, नहलाऐं-धुलाऐं, स्कूल छोड़ आऐं। उनसे खाली समय में बातचीत करें। उनकी साफ-सफाई करें। उनके साथ यदा-कदा ताष-पत्ती खेलें। इस प्रकार किसी न किसी प्रकार व्यस्त रहकर आप इस तरह की घटनाओं से बच सकती हैं। अपने चरित्र को मूल्यवान समझें, अपने व्यक्तित्व को महान समझें, हर किसी के सामने समर्पण भाव से आपका व्यक्तित्व कमजोर होता है। चरित्र पर गर्व कीजिए और फिर ध्यान रखिए खाली दिमाग शैतान का घर होता है।