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जहां धैर्य की कमी आपको तनाव, गुस्सा और दूसरी परेशानियां दे सकती है। वहीं विशेषज्ञों का मानना है कि धैर्य रखकर आप अपने जीवन को बेहतर बना सकती हैं। आइए जानें कैसे।
तनावग्रस्त, व्यग्र और झगड़ालू लोगों में अक्सर धैर्य की कमी पाई जाती है। विशेषज्ञ भी इससे सहमत हैं। उनका कहना है कि जिन लोगों में धीरता की कमी होती है, उनमें दिल की बीमारी की आशंका ज्यादा होती है और यही वजह है कि सब्र और दिल की सेहत के बीच सीधा संबंध है। यह भी माना जाता है कि अधीरता से आपको सांस लेने में तकलीफ, मांसपेशीय तनाव और झगड़ालू प्रवृत्ति जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। जरूरत धैर्य को धारण करने की कोशिश की है। आखिर सब्र का फल सेहतमंद दिल, दिमाग और शरीर होता है।
सोच-सोच का फर्क
ग्रॉसरी स्टोर में कतार में खड़े रहकर अपनी बारी का इंतजार करते हुए आप बेसब्र होने लगें तो अपने आस-पास शांति से खड़े लोगों को देखें और यह समझने की कोशिश करें कि सभी इंतजार कर रहे हैं। इसे अपने विचारों में जगह दें और खुद से कहें कि सेवा पहले मिलना अच्छा तो है लेकिन दूसरों के साथ यह न्याय नहीं होगा। अगर पांच मिनट इंतजार करना भी पड़े तो कोई दिक्कत नहीं।
खबरदार रहें
निर्णयात्मक हुए बिना अपने आस-पास देखकर खुद को खबरदार रखने का अभ्यास करें। इससे आप धैर्य रखना सीख सकती हैं। अपनी पांचों इंद्रियों की मदद के साथ भी आप ऐसा कर सकती हैं। यह बहुत ही आसान है। मसलन आप सूर्यास्त को इत्मिनान से खड़े होकर निहारते हुए भी कर सकती हैं।
सोचें फिर बोलें
किसी व्यक्ति तक अपनी बात मौखिक रूप से या किसी डिजिटल माध्यम से पहुंचाने से पहले रुकें और थोड़ा सोचें जरूर। विशेषज्ञों का मानना है कि कई बार हम नतीजों और सामने वाले की भावना की परवाह किए बिना अपनी बात बोल देते हैं। लेकिन बोलने से पहले सोचने की आदत से न केवल धैर्य रखना सीखा जा सकता है, बल्कि दूसरों का दिल दुखाने से भी बचा जा सकता है।
हमदर्दी साथ
धीरज आपके अंदर हमदर्दी पैदा करता है। जब आप सब्र रखना सीख जाती हैं तो आप सहनशील बनती हैं और दूसरों की भावनाओं को बेहतर रूप से समझ पाती हैं। अगर आप किसी के साथ हमदर्दी भरा व्यवहार करेंगी तो यकीनन वह भी आपके प्रति नरम रुख अख्तियार करेगा।
कारण क्या हैं
इस बात पर गौर करें कि वे कौनसी परिस्थितियां हैं, जो आपको धैर्य खोने के लिए मजबूर करती हैं और आपको गुस्सा आ जाता है। इन्हें पहचानकर आप इन परिस्थितियों में खुद को शांत रखना सीख सकती हैं। व्यायाम, प्रकृति के बीच चहलकदमी, अपने पालतू के साथ समय बिताना या लेखन जैसे काम इसमें आपकी मदद कर सकते हैं।
Published on:
13 Dec 2017 09:39 am
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